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स्मार्ट सिटी में ये हैं व्यवस्था और विकास के हाल सखे…?

सत्यम तिवारी

जबलपुर (जयलोक)। किसी ने कहा कि जबलपुर स्मार्ट सिटी हो गई है, किसी ने बताया कि ग्यारह सौ करोड़ से बनवाया गया फ्लाई ओवर शहर के विकास पुराण में एक नया अध्याय है, तो किसी ने बताया कि बस….शहर अब स्वच्छता के मामले में नंबर वन की पोजीशन पर आने वाला है? स्वच्छ हवा के नाम पर तो पहले ही एक पुरस्कार जबलपुर के नाम करवाने में कामयाबी मिल गई क्योंकि हवा की कोई तस्वीर नहीं होती? मगर कैमरे में कैद ये तस्वीरें, 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले विक्स एक्शन 500 गोली के उस विज्ञापन जैसा ही सवाल कर रही हैं जिसमें सर्दी जुखाम से पीडि़त एक खस्ताहाल व्यक्ति को दिखाकर उससे पूछा जाता था कि ये क्या हाल बना रखा है? कुछ लेते क्यों नहीं? ठीक वैसा सवाल आज स्पेस टेक्नॉलॉजी से बनवाई जा रही सडक़ों और अरबों खरबों रुपयों से बनवाए गए हवाई पुल से स्मार्ट बताई जा रही सिटी के दौर में ये नज़ारे व्यवस्था के जिम्मेदारों से कह रहे हैं कि आखिर ये क्या हाल बना रखा है? कुछ करते क्यों नहीं?
आपको भी जानकारी हो कि विकास और व्यवस्था की खिल्ली उड़ाती ये झांकी दमोह नाका चौराहे से गोहलपुर की ओर कुछ ही दूर पर चलने पर सरेआम देखी जा सकती है। शहर की विडंबना ये है कि व्यवस्था के जिम्मेदार कभी इस ओर ध्याने देने की फुरसत ही नहीं निकाल पाते? क्योंकि उन्हें तो अभी और नए नए विकास करवाना है ताकि और भला हो सके! कृपया अन्यथा ना समझे यहाँ ‘भला’ से मेरा मतलब शहर और शहरवासियों के भले से है और कुछ नहीं?
फ्लाई ओवर के नीचे यह खुली जगह छोडऩे का असल कारण तकनीकी है, सुविधात्मक है या व्यवस्थात्मक? यह कोई नहीं जानता। हाँ मगर क्षेत्रीय लोगों का बस यही कयास है कि पैदल आने जाने वाले लोग यहाँ से सडक़ पार कर सकें, इसलिए प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाई ओवर के नीचे यह सुरंगनुमा स्मॉल टनल छोड़ी गई थी शायद! जो अब अघोषित कचराघर और सार्वजनिक मूत्र विसर्जन केन्द्र बन चुकी है? यहीं दीवार पर नगर पालिक निगम की ओर से कचरा, गंदगी और पेशाब ना करने की सार्वजनिक अपील भी तीन तीन जगह लिखी गई है? बेहाली का हाल यहीं खत्म नहीं होता बल्कि फ्लाई ओवर से बारिश का पानी पास करने के लिए लोहे के फंदों पर टांगा गया प्लास्टिक का पाइप भी यहाँ क्षत विक्षत हालत में टंगा है? दो फंदे तो फांसी के फंदों की शक्ल में झूल रहे हैं जिनसे पाइप नदारत हो चुका है? जानकारी ये हाथ लगी कि यहाँ इतना कचरा इक_ा हो गया था कि निजात पाने के लिए किसी ने उसमें आग लगा दी? लपटों की गर्मी से प्लास्टिक पाइप भी पिघल गया और दो फंदों से नदारत हो गया? ऐसा भी तो हो सकता है कि व्यवस्था और व्यवस्थापकों सहित स्वच्छता अभियान का इस जगह से कोई रिश्ता नाता ही ना हो! बीच सडक़ पर मलबे, गंदगी और कचरे के अंबार के साथ मानव लघुशंका की बदबू नंबर वन स्वच्छता के शासकीय पुरस्कार लपकने में बाधक ही ना बनते हों!
हाँ मगर इतना जरूर है कि अभी कुछ ही दिनों बाद ये शहर जगदंबा की आराधना में लीन होगा, और इसी मार्ग पर इसी जगह से सटकर हज़ारों की तादात में जनता रूपी जनार्दन गुजरेंगे और सभी के हृदय मन मंदिर में ये सवाल अवश्य कौंधेंगे कि ये देखो ये हैं व्यवस्था के हाल सखे..?

 

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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