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फर्जी डॉक्टरों पर लगातार  कस रहा प्रशासन का शिकंजा, कलेक्टर के निर्देश पर गरूड़ दल लगातार कर रहा कार्रवाही

जबलपुर (जयलोक)। शहर के अस्पतालों पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाही से हडक़ंप मचा हुआ है। शहर में ऐसे कई चिकित्सक हैं जो फर्जी तरीके से ऐलोपैथी का ईलाज कर रहे हैं। ऐसे मामले पूर्व में शहर में कई बार सामने आ चुके हैं। लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में सोया रहा। दमोह में एक डॉक्टर के द्वारा  सात मरीजों की जान लिए जाने के बाद शहर का जिला प्रशासन और स्वास्थ विभाग नींद से जागा और अब ताबड़तोड़ तरीके से फर्जी अस्पतालों और चिकित्सकों पर कार्रवाही कर रहा है। इस कार्रवाही से फर्जी अस्पतालों और चिकित्सकों में हडक़ंप मचा हुआ है।

डॉ. सुलखिया का  क्लिनिक हुआ सील

इसी कड़ी में गरूड़ दल बिलहरी स्थित डॉ. दिव्यांश सुलखिया की क्लिनिक पहुँचा जहाँ दस्तावेजों की जाँच में पाया गया कि डॉक्टर बीएएमएस की डिग्री प्राप्त कर ऐलोपैथी का इलाज कर रहा था। क्लिनिक में कुछ मरीज भी भर्ती मिले साथ ही दवाएं भी ऐलोपैथी की मिलीं। जिसके बाद गरूड़ दल ने क्लिनिक को सील कर दिया है। कलेक्टर द्वारा गठित गरूड़ दल ने रांझी एसडीएम आरएस मरावी के निर्देशन में यह कार्रवाही की। जाँच के दौरान डॉ. दिव्यांश सुलखिया मरीजों का एलोपैथी ईलाज करते हुए पाये गये। डॉ. दिव्यांश से दस्तावेज माँगे जाने पर बीएएमएस की डिग्री होना बताया गया। अस्पताल में दस बेड लगे पाए गये तथा मौके पर तीन मरीज भर्ती थे। अस्पताल में एलोपैथी की दवाईयां पाई गईं। अस्पताल में क्लिनिक, नर्सिंग होम संचालन संबंधित अनुमति, रजिस्ट्रेशन नहीं पाया गया। अस्पताल में डॉ. दिव्यांश के बीएएमएस की डिग्री होने के बाद भी एलोपैथी पर ईलाज करने एवं अस्पताल में क्लिनिक, नर्सिंग होम संचालन संबंधित दस्तावेज नहीं होने के कारण पंचों के समक्ष क्लिनिक को सील किया गया।

बिना रजिस्टे्रशन के चल       रहा था अस्पताल

गरूड़ दल को जाँच में यह बात भी पता चली कि दस बेड का यह अस्पताल बिना रजिस्टे्रशन के चल रहा था। यहाँ मरीजों को भर्ती करने के लिए दस बेड भी लगे थे। जिसमें तीन मरीज भर्ती पाए गए। मरीजों को ऐलोपैथी उपचार दिया जा रहा था। जाँच के दौरान अस्पताल में क्लिनिक, नर्सिंग होम संचालन संबंधित अनुमति, रजिस्टे्रशन नहीं पाया गया।

रोज आते हैं दो दर्जन  से अधिक मरीज

पूछताछ के दौरान टीम को यह भी जानकारी मिली कि क्लिनिक में प्रतिदिन दो दर्जन से ज्यादा मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। जबकि डॉक्टर सुलखिया ऐलोपैथी इलाज की योग्यता नहीं रखता है। फिर भी मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए ऐलोपैथी का इलाज कर रहा था।

7 अप्रेल को भी हुई कार्यवाही

7 अप्रेल को भी इसी तरह की कार्रवाही गरूड़ दल ने एसडीएम अनुराग सिंह के निर्देशन और नायब तहसीलदार राजेश मिश्रा के नेतृत्व में पांडे क्लिनिक पर की थी। कार्रवाही के दौरान क्लिनिक संचालक डॉक्टर महेन्द्र पांडे उपस्थित मिले।
क्लीनिक के निरीक्षण का पंचनामा मौके पर तैयार किया गया तथा क्लीनिक में उपलब्ध दवाइयों की सूची दल के सदस्य डॉ व्यास द्वारा तैयार की गई जो इलेक्ट्रो होम्योपैथी की होना पाया गया। क्लीनिक में निरीक्षण के दौरान मरीज नहीं पाए गए। क्लीनिक संबंधी दस्तावेज मांगे जाने पर डॉ. महेंद्र पांडे द्वारा बताया गया कि पूर्व में एक प्रकरण में उनके लाइसेंस संबंधी दस्तावेज न्यायालय में जमा है।

और भी अस्पतालों  की खुलेगी पोल

बीएएमएस की डिग्री लेकर ऐलोपैथी इलाज करने वाले शहर में डॉक्टर सुलखिया अकेले नहीं हैं। इस तरह के और भी डॉक्टर हैं जो बीएएमएस की डिग्री लेकर ऐलोपैथी ईलाज कर रहे हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाही से ऐसे बहुत से अस्पतालों और क्लिनिकों के डॉक्टरों की पोल खुलनी बाकी है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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