
बैगा आदिवासियों के आंदोलन के बाद भी चुप है मध्य प्रदेश सरकार
कटनी के बीपीएल सूची वालों ने डिंडोरी में जाकर खरीद ली सैकड़ों एकड़ जमीन
जबलपुर (जय लोक/डिंडोरी)। मध्य प्रदेश के सबसे रईस माने जाने वाले भाजपा के कटनी जिले के विजरावगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय पाठक पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बैगा आदिवासी की जमीन खरीदने के मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं और सीधा और तीखा हमला भी किया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए संजय पाठक आदिवासियों को लूट रहे हैं। उनके पिता सत्येंद्र पाठक मेरे साथ मंत्रिमंडल में थे लेकिन उनका बेटा भाजपा के मंत्रिमंडल में रह चुका है और वह आदिवासियों में बैगाओं को लूटने का काम कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाए की डिंडोरी जिले में पिपरिया पंचायत में बॉक्साइट की तीन खदानें स्वीकृत हुई हैं और यह सभी खदानें संजय पाठक की कंपनी की हैं। यह पूर्व नियोजित षडयंत्र है जिसके तहत आदिवासियों को लूटने का कार्य किया गया है।
यह आरोप लगाया गया है कि कटनी विजरावगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरही के दो आदिवासी एवं अन्य इसी विधानसभा के दो और आदिवासियों के नाम से तकरीबन 250 किलोमीटर दूर 1100 करोड़ रुपए की आदिवासी भूमि ओने पौने दाम में खरीद कर रजिस्ट्री करा ली गई है।
आदिवासियों के साथ हुए इस छलकपट की आज तक कोई जाँच सरकार की ओर से नहीं हुई हैं। डिण्डौंरी जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है। यहां पिछले कई दिनों से आदिवासी अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और धरने प्रदर्शन पर बैठे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि आदिवासियों के संघर्ष की आवाज सुनकर हम उनका साथ देने यहां तक पहुँच गए लेकिन आज तक प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।
दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए दस्तावेज दिखाते हुए यह दावा किया कि यह चारों आदिवासी संजय पाठक के कर्मचारी हैं। बहुत हद तक उन्हें भी शायद यह जानकारी ना होगी कि उनके नाम से 1100 करोड़ रुपए की भूमि खरीदी गई है। उन्होंने चारों आदिवासियों के नाम भी सार्वजनिक रूप से बताए जिनमें रघुराज, राकेश, नत्थू एवं प्रहलाद आदिवासी के नाम पर यह जमीन खरीदी गई है।

गरीबी रेखा में नाम दर्ज फिर कहां से आये 1100 करोड़
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान संजय पाठक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी उनकी ही साजिश है आदिवासियों को ठगने के लिए पैसे का लालच देकर अपने कर्मचारी आदिवासियों को तैयार किया गया। जिन-चार आदिवासियों के नाम से 1100 करोड़ रुपए की भूमि की रजिस्ट्री होने की बात सामने आ रही है यह चारों आदिवासी लोग सरकारी दस्तावेजों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोग हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके पास 1100 करोड़ रुपए भूमि क्रय करने के लिए कहां से आये। इस बात की जाँच क्यों नहीं की जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह आरोप लगाया है कि आदिवासियों के हक के लिए प्रदेश सरकार बड़े-बड़े दावे तो कर रही है लेकिन अपने ही पूर्व मंत्री द्वारा किए गए करोड़ों रुपए के खेल को छुपाने का कार्य किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले के संदिग्ध होने के बावजूद भी जाँच नहीं की गई और बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से पहले आदिवासियों के नाम से भूमि क्रय की गई उसके बाद यहां पर बॉक्साइट की तीन बड़ी खदानों की अनुमति दे दी गई। इस पूरे खेल के बाद से लगातार मामला गरमाता जा रहा है और आदिवासी समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर लगातार अपनी आवाज मुखर कर रहे हैं।

Author: Jai Lok







