
जबलपुर (जयलोक)। ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और धमाचौकड़ी को लेकर भोपाल में ई-रिक्शा चालकों को स्कूली बच्चों को लाने ले जाने के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। भोपाल में हुई इस कार्रवाही की सराहना भी हो रही है लेकिन इसके विपरित शहर में इस तरह को कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। जिसके कारण शहर में ई-रिक्शा चालक बेधडक़ अपनी मनमर्जी पर उतारू हैं। स्कूली बच्चों को स्कूल से लाते और ले जाते हुए बेधडक़ ई-रिक्शा चालक सडक़ों पर देखे जा सकते हैं। जबकि ई-रिक्शा के ढांचे को देखकर यह पहले ही कहा जा चुका है कि ई-रिक्शा लोगों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन इसके बाद भी शहर में ई-रिक्शा पर लगाम कसने की कोई तैयारी नहीं दिख रही है।
मुनाफे के चक्कर में मासूमों की जान से खिलवाड़- मुनाफे के चक्कर में कई चालकों ने ई रिक्शा खरीद लिए हैं और उसमें बच्चों को ढोया जाने लगा है। ई-रिक्शा से कई हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी उनके लिए सख्त नियम नहीं बने। पूर्व में भी इस तरह के हादसे देखने को मिले हैं जिसमें जरा सी टक्कर लगते ही ई-रिक्शा बीच सडक़ पर पलट जाते हैं। ऐसे में या तो ई-रिक्शा में बैठी सवारी को जान से हाथ धोना पड़ता है या फिर उनकी आँख अस्पताल में खुलती है। लेकिन इन सबके बावजूद मासूम बच्चों को बेरोकटोक ई-रिक्शा में स्कूल से लाने ले जाने का कार्य किया जा रहा है।

इसलिए असुरक्षित है ई रिक्शा
ज्यादातर ई रिक्शा बनाने का काम बड़ी कंपनियां नहीं कर रही है। इसमें घटिया बैटरी का इस्तेमाल होता है। ब्रिज व चढ़ाई वाले हिस्सों में ई-रिक्शा बड़ी मुश्किल से आगे बढ़ पाते है। इस कारण हादसों का खतरा बना रहता है। ई रिक्शा का सस्पेंशन कमजोर रहता है। खराब सडक़ व स्पीड ब्रेकर में कमर में जर्क लगने का खतरा रहता है। इसके अलावा झटके से रिक्शा से बाहर गिरने का खतरा भी बना रहता है। ई रिक्शा का ढांचा मजबूत नहीं है। उसके कई भाग खुले रहते हैं, दरवाजे भी ज्यादातर ई-रिक्शा में नहीं लगे रहते हंै। हादसे के समय चोट लगने का खतरा ई-रिक्शा में ज्यादा रहता है। वहीं बीच सडक़ पर चलते चलते अचानक ही ईरिक्शा पलट जाते हैं जिससे आसपास दौड़ रहे वाहन चालकों को भी इनसे खतरा बना रहता है।
अभिभावकों की भी लापरवाही- ई-रिक्शा में इतनी खामियों के बाद भी कई अभिभावक अपने बच्चों को ई-रिक्शा चालकों के हाथों स्कूल भेजने के लिए सौंप देते हैं। अभिभावक ई-रिक्शों के खतरों से अनजान बने रहते हैं और उनका ध्यान अपने बच्चों के सुरक्षित रहने पर नहीं रहता है।

Author: Jai Lok







