
रायपुर (जयलोक)। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पर्व पर जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का विशाल आयोजन संपन्न हुआ समस्त छत्तीसगढ़ के भक्त पूज्यपाद ब्रह्मलीन ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के समस्त भक्त जन, शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉक्टर स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने गुरु मंडल का पूजन करके अपने प्रथम चातुर्मास व्रत का संकल्प ग्रहण किया तत्पश्चात समस्त भक्तों ने मिलकर के पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी महारानी का विभिन्न द्रव्यों से अर्चन संपन्न किया तथा शंकराचार्य जी महाराज की पादुका का पूजन, गुरु पूजन, परम गुरु पूजन, परमेष्ठी गुरु पूजन परात्पर गुरु पूजन तथा गुरु परंपरा का पूजन भी समस्त भक्तों ने मिलकर के किया। आश्रम के प्रमुख डॉ. इन्दुभवानंद तीर्थ ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि व्यक्ति को कभी भी गुरु में मनुष्य बुद्धि नहीं रखना चाहिए श्रीमद् भागवत में भगवान उद्धवजी को उपदेश देते हुए कहते हैं कि तुम गुरु मुझे ही समझो गुरु में कभी भी असूया बुद्धि भेद बुद्धि नहीं होना चाहिए जो गुरु को मनुष्य समझता है, मंत्र में अक्षर बुद्धि रखता है तथा मूर्ति में पाषाण बुद्धि रखता है,उसका शीघ्रपतन, विनाश हो जाता है गुरु को मनुष्य नहीं साक्षात परमात्मा समझना चाहिए। गुरु कोई व्यक्ति नहीं होता है अपितु साक्षात परमात्मा ही गुरु के रूप में आकर शिष्य के हृदय के अंधकार को नष्ट करता हैऔर मनुष्य को जो जीवात्मा का अभिमान हो गया है उसको गुरु महाराज दूर करते हैं इसलिए संसार में यदि आकर किसी तत्व की खोज करना है तो वह है गुरु की खोज की जा सकती है उसके पूर्व शंकराचार्य आश्रम के आचार्य धर्मेंद्र महाराज ने संन्यास की परंपरा और सन्यासियों के चातुर्मास व्रत की चर्चा करते हुए बताया कि संन्यासी साक्षात् नारायण का स्वरूप माना जाता है पूजन पाठ और कर्मकांड भाग को दीपक वैदिक एवं महेंद्र शास्त्री तथा आश्रम के समस्त बटुक छात्रों ने संपन्न कराया।

ज्ञान केवल शिव से ही प्राप्त हो सकता है
चातुर्मास प्रवचन माला का उद्घाटन सत्र प्रारंभ करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम वोरिया कला में चातुर्मास कर रहे परम पूज्य स्वामी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने चल रही शिव पुराण की कथा के प्रसंग में बताया कि ज्ञान केवल भगवान शिव से ही प्राप्त हो सकता है मुक्ति का ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान दोनों ही भगवान शिव से प्राप्त किया जा सकते हैं भगवान शंकर ज्ञान के निधान हैं, जब तक भगवान शिव की कृपा नहीं होती है तब तक जीव को मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है और जब तक भगवान शिव की कृपा प्राप्त नहीं होती है तब तक नारायण की भी कृपा आप प्राप्त नहीं कर सकते हैं भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है भगवान शिव इस प्रकृति के अत्यंत सरल और सहज देव हैं इसलिए इन्हें आशुतोष के नाम से भी जाना जाता है श्रावण के मास में भगवान शिव मृतिका मिट्टी के रूप में विराजमान हो जाते हैं मिट्टी का लौंदा उठा करके उसकी आप पूजा करेंगे तो है वह पूजा भगवान शिव को प्राप्त हो जाएगी इसलिए सावन का महीना पूर्ण रूप से भगवान शिव के लिए समर्पित होता कथा के पूर्व यजमानों ने शिव पुराण की पोथी का पूजन किया तत्पश्चात आरती कर शिव पुराण की कथा प्रारंभ हुई। ज्ञातव्य हो कि शंकराचार्य आश्रम में डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज का प्रथम चातुर्मास चल रहा है प्रात: काल से विभिन्न अनुष्ठीयमान कार्यक्रम चल रहे हैं प्रात: काल भगवान शिव का पार्थिव पूजन मध्यान्ह काल में भगवती की आरती एवं सायंकाल भगवान सिद्धेश्वर का रुद्राभिषेक एवं प्रवचन नित्य प्रति हो रहा है।

Author: Jai Lok







