
राजेन्द्र चंद्रकांत राय
जबलपुर (जयलोक)। 29 जुलाई, 2010 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में व्लादिमीर पुतिन ने बाघ शिखर बैठक का आयोजन किया था। इस अवसर पर हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय किया गया था। बैठक में शामिल 13 देशों ने अपने-अपने देशों में 2022 तक बाघों की मौजूदा संख्या को दोगुना करने का संकल्प लिया था। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर आलोक बैनर्जी बताते हैं कि प्रकृति में जितनी भी जीव तथा वानस्पतिक प्रजातियां हैं, उन सबका आपस में गहरा संबंध है और वे एक-दूसरे का जीवन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती हैं। बाघ भी धरती की पारिस्थिकी प्रणाली में एक महत्वपूर्ण जीव है। वह खाद्य श्रृंखला में भी अहम भूमिका निभाता है।
पर मानवीय गतिविधियों तथा अन्य पर्यावरणीय परिवर्तनों के चलते बाघ प्रजाति पर संकट छाया हुआ है। इस संकट से निबटने के लिए ही अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। यह बात सभी को जाननी चाहिए कि बाघों के संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बाघों को विलुप्त होने से बचाने के लिए निरंतर प्रयासों की जरूरत है। इसके अलावा बाघों पर आने वाले खतरों को सार्वजनिक करने और उनके आवास स्थलों तथा आबादी की सुरक्षा के लिए वैश्विक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
बाघ दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित जानवरों में से एक हैं, लेकिन वे गंभीर खतरे में हैं। अवैध शिकार, उनके आवास स्थलों का नुकसान और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों के कारण उनकी आबादी तेजी से घट रही है।बाघों को बचाने का एक महत्वपूर्ण काम उनके आवासों की रक्षा करना है, जिसमें जंगल, घास के मैदान और वेटलैंड आदि का विकास शामिल है। भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम में भी बाघ पाए जाते हैं। दुनिया में पाए जाने वाले कुल बाघों की 70 फीसदी आबादी भारत में पाई जाती है। भारत में भी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ हैं। इसी लिए मध्यप्रदेश को बाघ स्टेट का दर्जा प्राप्त है।
चित्र आलोक बैनर्जी के कैमरे से

Author: Jai Lok







