
ऑटो चार पहिया वाहनों ने बढ़ाया सिरदर्द
जबलपुर (जयलोक)। मर रहा व्यापार, मर रहा कारोबार, रेंग रहा ट्रैफिक, बीमार हो रहा राहगीर और बर्बाद हो रहा व्यापारी ये कोई कवितामयी पंक्तियां नहीं, बल्कि जबलपुर शहर के मिलौनीगंज से मालवीय चौक तक और उससे सटे व्यावसायिक इलाकों की हकीकत है। यहां का हर दिन एक त्रासदी बनता जा रहा है। दोनों तरफ से वाहन प्रवेश कर रहे हैं, वन वे ट्रैफिक ने दम तोड़ दिया है।

मिलौनीगंज, कमानिया गेट, बड़ा फुहारा, निवाडग़ंज, गल्ला मंडी और अंधेरदेव ये इलाके कभी शहर के सबसे चहल-पहल वाले व्यापारिक केंद्र माने जाते थे। लेकिन अब ये क्षेत्र जाम, धूल और अव्यवस्था के पर्याय बन चुके हैं। दोपहर 1 बजे से लेकर रात 9 बजे तक यहां राहगीरों के लिये गुजरने और ग्राहकों के लिये समान खरीदने के लिये पैर रखने की भी जगह नहीं है।

प्रशासनिक बेशर्मी और उदासीनता
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा क्षेत्र 5 थाना क्षेत्रों कोतवाली, हनुमानताल, लार्डगंज, बेलबाग, ओमती और ट्रैफिक थाना की सीमा में आता है, बावजूद इसके यातायात की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ट्रैफिक पुलिस की निष्क्रियता और नगर निगम की उदासीनता के चलते लोगों को रोज बेमतलब के जाम में फंसना पड़ता है। ई-रिक्शा, ऑटो और गलत तरीक से घुसती कारें और अवैध रूप से सडक़ पर अतिक्रमण पूरी सडक़ों को जाम कर देते हैं। कई जगह तो हाल यह है कि एक एंबुलेंस भी फँसी रह जाए तो निकल पाना मुश्किल हो जाए।

राखी की उम्मीद भी धूमिल
व्यापारियों के लिए राखी का त्यौहार आखिरी उम्मीद की तरह होता है एक ऐसा मौका जब कुछ बिक्री हो जाए, कुछ आमदनी आ जाए। लेकिन ट्रैफिक की भयावह स्थिति ने इस बार वह उम्मीद भी लील ली है। ग्राहक दुकानों तक पहुँच नहीं पा रहे, और जो आते हैं, वो भी जाम की झुंझलाहट में लौट जाते हैं। इस अराजकता के लिये जितना नगर निगम और पुलिस दोषी है, उतना ही व्यापारी भी दोषी हैं। जो अपनी दुकानों के सामने किराए पर जगह देकर सडक़ पर दुकान लगवा देते हैं। अतिक्रमण हटाने के लिये कुछ दिन की सक्रियता के बाद फिर हालात ढाक के तीन पात नजर आ रहे हैं।
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Author: Jai Lok







