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अवैध उत्खनन को रोकना बड़ी चुनौती, लक्ष्य निर्धारित कर होगा एक्शन

नए खनिज अधिकारी अशोक राय ने कहा-जिस निरीक्षक का क्षेत्र उसकी जवाबदारी होगी, खनिज चोरी रोकने उठाएंगे प्रभावी कदम

जबलपुर (जयलोक)। जबलपुर (जयलोक)। खनिज से प्रदेश को विगत वर्ष 1200 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था इसमें से 60 प्रतिशत आय देने वाला सिंगरौली जिला रहा है, क्योकि सिंगरोली जिले में खनिज सम्पदा काफी अधिक है और बहुत ही बड़े स्तर पर इसका कार्य होता है इसलिए शासन भी अपने विभाग के सबसे दक्ष अधिकारियों में शुमार लोगों को यहाँ पदस्थ करता है। अब जबलपुर के नए खनिज अधिकारी के रूप में सेवाएं देने वाले अशोक राय एक पखवाड़े पहले ही कार्यभार संभाल चुके है। अशोक राय ने अलग अलग समय पर लगभग 27 साल सिंगरौली जैसे क्षेत्र में गुजारे हंै। यह बात इसलिए प्रासंगिक है कि यह उनके कार्यक्षमता और परिणाम देने की क़ाबलियत को दर्शाता है। अब वो जबलपुर में पदस्थ हैं। जबलपुर में खनिज क्षेत्र की अपनी समस्याएं और चुनौतियाँ हैं। इसलिए यह उम्मीद की जाएगी है कि एक दक्ष अधिकारी खनिज विभाग की बिगड़ी व्यवस्था को पटरी पर लाने के कुछ बड़े कदम उठाएंगे।

 

वर्तमान समय में खनिज विभाग के कुछ निरीक्षक भी यहां से वहां हुए है। यानी अब खनिज विभाग में नए वरिष्ठ अधिकारी से लेकर नए निरीक्षकों की टीम मौजूद है। मतलब यह अपेक्षा किया जाना भी जायज है कि अब जिले में जारी खनिज चोरी का काम और कम से कम इसको रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
खनिज अधिकारी अशोक राय का कहना है कि वह जिन क्षेत्रों में अवैध खनिज चोरी किया जा रहा है उनकी पूरी जानकारियां प्राप्त कर अपना एक्शन प्लान बनाएंगे। खनिज अधिकारी राय ने कहा कि जिस खनिज निरीक्षक को जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी उस क्षेत्र में अगर अवैध रूप से उत्खनन कर खनिज की चोरी होती है उसकी जवाबदारी उस निरीक्षक की ही मानी जाएगी।

 

सांठगाठ की गांठ का कोड वर्ड गाँधी
बहुत लंबे अरसे से जबलपुर में खनिज चोरों और खनिज के चौकीदारों के बीच में लंबी सांठगांठ का खेल चल रहा है। इनके बीच की साठगांठ की गांठ है उसका कोड वर्ड गाँधी रखा गया है। वर्तमान में नए खनिज अधिकारी के समक्ष यह चुनौती भी है कि दफ्तर में कदम रखने वालों से चपरासी से लेकर बाबू, निरीक्षक तक सामान्य कार्य करने से पहले ही गाँधी की भाषा बोलने के आदि हो चुके लोगों पर नकेल कैसे कसी जाएगी।

 

जिले की वरिष्ठ अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि जब भी सूचना मिलने पर खनिज चोरी करने वालों के खिलाफ  कार्यवाही करने के लिए मुख्यालय से दल रवाना होता है तो उसकी जानकारी उनको पहले मिल जाती है इसलिए अधिकांश कार्यवाही बैरंग होती है। अधिकारी बदले हैं तो उम्मीदें भी बदली है। अभी हाल ही में राजस्व विभाग के तहसीलदार स्तर के अधिकारी ने बरगी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बढिय़ाखेड़ा, धधरा, समद पिपरिया आदि क्षेत्रों में लगातार तीन-चार दिन तक छापे मार शैली में कार्यवाही कर 5 से अधिक ट्रक और हाईवा को अवैध रूप से खनिज ले जाते हुए पकड़ा था। जानकारी तो विभाग को अवैध खुदाई करने वालों के बारे में भी पूरी प्राप्त हो चुकी है, लेकिन खनिज विभाग ने अभी तक किसी प्रकार की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर जबलपुर तहसील के एसडीएम अभिषेक ठाकुर ने तहसीलदार प्रदीप तिवारी और उनकी टीम को छापामार कार्यवाही के लिए भेजा था। फिर न्याययिक और गैर न्यायिक कार्यों का विभाजन होने के बाद अवैध रूप से खनिज की चोरी करने वाले फिर सक्रिय हो गए है।

 

सबको है जानकारी लेकिन नहीं होती कार्यवाही
जिले में कहा कौन अवैध रूप से खनिज की चोरी कर रहा है, कौन किस्से जुड़ा हुआ है, किसके संरक्षण में यह काम चल रहा है, सबको सब पता है। लेकिन शासन की भूमि पर अवैध खनिज उत्खनन नहीं रुक रहा है। दिन दहाड़े से लेकर रात भर अवैध खनिज से भरे वाहन सडक़ों पर दौड़ रहे है। लेकिन इसको रोकने और कार्यवाही करने की हिम्मत कोई नहीं दिखा रहा है।

 

साल भर से चल रही थी अवैध खदान इसका जिम्मेदार कौन?
धाधरा के जिस स्थान पर अवैध खदान से खुदाई की जा रही थी वो लगभग एक दो सालों से चल रही थी। तहसीलदार ने जब मौके पर छापा मारा तो जेसीबी चालक दूर से देखकर ही जंगल में वाहन दौड़ाते हुए भाग गया। तीन हाईवा मौके से पकड़े गए थे। अब ऐसे में सालों से शासकीय संपत्ति से खनिज को चोरी होते देखते रहने की जिम्मेदारी किसकी है और कौन इसका दोषी है।
यह तो एक स्थान का आंकलन है ऐसी कई अवैध खदानें जबलपुर में खुलेआम संचालित हो रहे हैं। राजनीतिक दबाव की आड़ में मोटे पैसे के लेनदेन के कारण सबके हाथ बंधे हुए हैं और मुंह पर चुप्पी है। खुलकर खनिज लूट रहा है प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है लेकिन इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।जिला प्रशासन खनिज चोरों के खिलाफ  बड़ी कार्यवाही करने की योजना बना रहा है। ग्रामीण भी अब शिकायत करने में मुखर हो चुके हैं। वीडियो फोटो के साथ सीधे बड़े अधिकारियों तक जानकारी और खनिज चोरों की हरकतें पहुँच रही हैं। नए खनिज अधिकारी के लिए चुनौती बहुत है, लेकिन उनके अनुभव की क्षमता को देख अच्छे परिणामों की आशा की जा रही है।

 

एक चुनौती यह भी-फील्डिंग लगाकर होती है तकवारी
खनिज अधिकारी अशोक राय के लिए भी यह कोई नई बात नहीं होगी और वो यह जानते ही होंगे कि खनिज चोर इतने शातिर हैं कि खनिज विभाग में घुसपैठ और पैसे के दम पर यहां काम करने वालों को ही अपना मुखबिर बनाकर चोरी का खेल खेल रहे हैं। इसके अलावा बरगी क्षेत्र में अलग अलग स्थानों पर खनिज चोरी करने वाले अपने गुर्गों से पूरी फील्डिंग लगवाकर ये कार्य कर रहे है। तिलवारा के नर्मदा पुल से लेकर तिलहरी -बिलहरी रोड और बीच बीच के स्थान पर यह लोग फील्डिंग लगाए सरकारी वाहनों को ताकते रहते हंै। जैसे ही कोई सरकारी वाहन या खनिज विभाग की गाड़ी गुजरती है तो यह अवैध उत्खनन स्थल पर खबर पहुंचा देते हैं और वहां से पोकलेन जैसी मशीन समय पर हटा दी जाती है। अब खनिज विभाग को अपनी रणनीति बदलना होगी।
नए खनिज अधिकारी अशोक राय का कहना है कि खनिज चोरों की पूरी रणनीति के बारे में जानकारी ली जा रही है और उसके अनुरूप ही उन्हें करारा जवाब देते हुए सख्त कार्यवाही की जाएगी। जल्दी ऐसे खनिज चोरों के खिलाफ होने वाली कार्यवाही के परिणाम दिखने लगेंगे।

 

याद करो वो कार्यवाही …जिले का मुखिया   मजबूत है अब नए टीम पर सबकी नजर
कुछ दिनों पहली ही जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने उप मख्यमंत्री के दौरे के बीच शहपुरा में लम्बे समय से चल रही रेत की एक अवैध खदान पर की जा रही चोरी और अवैध उत्खनन के खिलाफ  फिल्मी स्टाइल में बड़ी कार्यवाही कार्यवाई थी। लम्बे समय के बाद अपर कलेक्टर नाथूराम गौड़ के नेतृत्व में गोपनीय तरीके से यहाँ से बड़ी संख्या में अधिकारियों और पुलिस बल को पहले सिवनी की ओर भेजा गया था फिर वहां से वापस घूम कर मौके पर छापा मारा गया था। इस कार्यवाही में सत्ता पक्ष के बड़े बड़े लोगों के नाम भी आये थे। 35 लाख से अधिक का जुर्माना भी अधरोपित किया गया था। बात स्पष्ट है जिले का मुखिया मजबूत है अब खनिज की नई टीम के क्षेत्रवार जिम्मेदारी देकर उसको मजबूत कर नए खनिज अधिकारी अच्छे परिणाम शासन के हित में ला सकते है और बिके-बिकायों का खेल खटाई में पड़ सकता है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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