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उषा भार्गव कांड में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव की गवाही मंंडला में दर्ज कराई गई थी

तभी प्रधानमंत्री नेहरू ने जबलपुर को गुंडों का शहर कहा था

फोटेा कैप्शन = डॉ. वीवी श्रीवास्तव शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती के निजी चिकित्सक भी रहे।
जबलपुर (जय लोक)। जबलपुर के चिकित्सा जगत में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव एक नामवर हस्ती थे। रोग की पहिचान यानी डायग्नोस और ऑपरेशन के मामले में उनका लोहा माना जाता रहा है। वे जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन करने वाले कुशल सर्जन के रूप में पहचाने जाते रहे। कल 93 वर्ष की अवस्था में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव का निधन हो गया। मेडिकल कॉलेज तथा जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के साथ ही संभाग के मंडला तथा अन्य अस्पतालों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। डॉ. श्रीवास्तव जी जब विक्टोरिया अस्पताल में कार्यरत रहे तब इस अस्पताल में सबसे चर्चित नाम इन्हीं का रहा है।
जबलपुर में वर्ष 1961 में उषा भार्गव कांड घटित हुआ था। आजादी के बाद जबलपुर का यह देश का पहला सांप्रदायिक दंगा माना गया। इस कांड में एक समुदाय विशेष के  युवक ने उषा भार्गव के साथ उसके घर में घुसकर दुराचार किया था। जिससे आहत होकर उषा भार्गव ने अपनी जान दे दी थी। इस घटना के बाद जबलपुर में जमकर सांप्रदायिक दंगे हुए। इन दंगों का ही यह नतीजा रहा की देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जबलपुर को गुंडों का शहर कहा था। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेत्री सुभद्रा जोशी को जाँच के लिए जबलपुर भेजा था। जब उषा भार्गव कांड की जाँच हुई तब इस जाँच में उसका उपचार करने वाले डॉक्टर वी वी श्रीवास्तव की गवाही को बहुत महत्वपूर्ण माना गया। उषा भार्गव कांड की जाँच जबलपुर के बजाय मंडला में कराई गई थी। डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव को जबलपुर से मंडला ले जाकर वहां उनकी गवाही दर्ज कराई गई थी। उनकी गवाही पर ही पूरा दारोमदार टिका रहा। डॉक्टर श्रीवास्तव ने बेबाकी से अपनी गवाही को दर्ज कराया।

डॉ. श्रीवास्तव ने विक्टोरिया अस्पताल में रहते हुए शहर की कई बड़ी हस्तियों के इलाज भी किये और उनके ऑपरेशन भी किये। शहर में कई ऐसी घटनाएं हुईं जिनमें शिकार हुए लोगों को बचाया जाना प्रशासन द्वारा बहुत जरूरी माना जाता रहा, ऐसे समय में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मदद मांगा करते रहे। डॉ. श्रीवास्तव ऐसे चिकित्सक रहे जिन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र का उपचार किया और सिविल लाइन में मिश्र जी के निवास पर उनका नियमित रूप से जाना होता रहा है। पूर्व महापौर, सांसद और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष तथा नवीन दुनिया के संपादक रहे पंडित मुंदर शर्मा तो उनके निवास के चिकित्सालय में नियमित रूप से जाते रहे हैं। शर्मा जी श्रीवास्तव जी पर बहुत भरोसा करते थे। अग्रज अजित वर्मा जी भी नवीन दुनिया में कार्य करते रहे। तब ऐसे मौके भी आते थे जब उनके पंडित मुंदर शर्मा से मतभेद हो जाते थे। तब डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे और जब पंडित शर्मा डॉक्टर श्रीवास्तव जी के यहां उपचार के लिए जाते तब  डॉक्टर श्रीवास्तव शर्मा जी को वास्तविक से अवगत कराते थे और गलतफहमियां भी दूर करते थे। ऐसे और भी शहर के कई प्रमुख लोग रहे जिनका डॉक्टर श्रीवास्तव ने इलाज किया। वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र दत्त भी डॉक्टर श्रीवास्तव से नियमित रूप से उपचार कराते रहे। प्रोफेसर हनुमान वर्मा के पेट का जटिल आपरेशन भी डाक्टर श्रीवास्तव ने किया था। मौजूदा महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की गंभीर बीमारी को डाक्टर श्रीवास्तव जी ने ही पहिचाना था।
50 वर्ष पूर्व पत्रकार और गीतकार ओंकार तिवारी जी ने अजित वर्मा जी और मेरा परिचय डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव जी से कराया। यह परिचय ऐसा प्रबल होता चला गया कि डॉक्टर श्रीवास्तव जी हमारे अग्रज हो गए। उन्होंने हमेशा अग्रज की भूमिका निभाई और हमारे सुख दुख में सम्मिलित रहे। अजित वर्मा जी और मेरे परिवार के अभिभावक के रूप में भी वे भूमिका निभाते और बच्चों से लेकर बड़ों तक का उपचार भी करते रहे।

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती से ओंकार तिवारी जी के माध्यम से ही डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव, अजित वर्मा जी और मेरा परिचय हुआ और यह परिचय ऐसा बढ़ता चला गया कि हम तीनों ही शंकराचार्य जी के दीक्षित शिष्य बन गए। तब शंकराचार्य जी के सेवा प्रकल्पों से जुडऩे का अवसर भी हम तीनों को मिला। डॉ.  श्रीवास्तवजी कुछ ही समय में शंकराचार्य जी के निजी चिकित्सक बन गए और उनके जीवन के अंतिम क्षण तक चिकित्सा सेवा करते रहे। शंकराचार्य जी वनवासियों के लिए चिकित्सा शिविर भी आयोजित करते रहे हैं इन चिकित्सा शिविरों को डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव ही संचालित करते रहे। इस तरह उन्होंने शंकराचार्य जी के माध्यम से हजारों वनवासियों की और गरीब लोगों की चिकित्सा सेवा की। झारखंड के सघन जंगल वाले मनोहरपुर जिले के काली कोकिला नदी के संगम पर सघन वन क्षेत्र में शंकराचार्य जी ने विश्व कल्याण आश्रम बनाया। इस आश्रम में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव हर वर्ष चिकित्सा सेवा देने के लिए जाते रहे। बाद में डॉक्टर श्रीवास्तव जी के नेतृत्व में ही शंकराचार्य जी ने यहां पर एक विशाल अस्पताल का निर्माण भी वनवासियों की सेवा के लिए कराया। शंकराचार्य जी की अस्वस्थता के समय भी डॉ. श्रीवास्तव उनका उपचार करते रहे हैं। शंकराचार्य जी को यदि बेंगलुरु तथा देश के अन्य बड़े शहरों में यदि उपचार के लिए ले जाया जाता था तब भी शंकराचार्य जी डॉ. श्रीवास्तव को उपस्थित रखा करते थे और उनका परामर्श भी लेते रहते थे। एक बार जबलपुर अस्पताल में शंकराचार्य जी को पेट में ऐसी तकलीफ  हुई की उन्हें एयर एंबुलेंस से ले जाने की तैयारी की जा रही थी इसी बीच शंकराचार्य ने डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव को बुलवाया और अपनी परेशानी बताई डॉक्टर श्रीवास्तव जी ने कुछ ही समय में शंकराचार्य जी के पेट को दबा दबा कर उनके दर्द को कम कर दिया और शंकराचार्य जी को उपचार के लिए एयर एंबुलेंस से जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
हमारे अग्रज अजित वर्मा जी के उपचार के लिए भी डॉक्टर श्रीवास्तवजी ने रात दिन एक कर दिया। कल जब गौरीघाट में डॉ. श्रीवास्तव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही थी तब जयलोक के संपादक परितोष वर्मा श्रद्धांजलि देने के दौरान बेहद भावुक हो गए और वे कुछ ज्यादा बोल भी नहीं पाए। यह डॉ. श्रीवास्तव जी के प्रति आत्मीय भाव को प्रगट करने वाला क्षण रहा। डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव जी का चला जाना हमारी अपूर्णीय क्षति है। जय लोक परिवार की ओर से डॉक्टर श्रीवास्तव जी के चरणों में शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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