
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर वैश्विक उत्साह के बीच एक नया तर्क सामने आया हैं कि एआई अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन उन कारणों से नहीं जिनकी आमतौर पर चर्चा होती रहती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा स्थिति 1929 की आर्थिक मंदी से पहले के दौर से मिलती-जुलती है, जब नई तकनीक को लेकर अत्यधिक निवेश ने बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी थी। 1929 के संकट से पहले शेयर बाजार में भारी सट्टेबाजी हुई थी।

तब उस दौर में रेडियो जैसी नई तकनीक को क्रांतिकारी माना गया, लेकिन उसके कारोबारी मॉडल को लेकर स्पष्टता नहीं थी। नतीजतन, निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पूंजी झोंक दी और शेयर कीमतें वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक बढ़ गईं। आलोचकों का तर्क है कि आज एआई, विशेषकर बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम), उसी तरह के ‘हाइप साइकिल’ का हिस्सा बन चुके हैं।उनका कहना है कि एआई एक परिवर्तनकारी तकनीक है, लेकिन एआई को लेकर टिकाऊ और लाभदायक बनाने का स्पष्ट आर्थिक मॉडल अभी तैयार नहीं हुआ है। वर्तमान में कंपनियां एआई सेवाओं को पेवॉल या विज्ञापन आधारित मॉडल पर पेश कर रही हैं, जबकि डिजिटल विज्ञापन बाजार पहले से संतृप्त माना जाता है। इसतरह के निवेश पर ठोस रिटर्न की कमी चिंता का विषय बन रही है। कुछ विशेषज्ञों का ये भी मत है कि एआई मुख्य रूप से पुनरावृत्ति वाले कार्यों—जैसे कोडिंग, दस्तावेज तैयार करना या डेटा विश्लेषण में काफी प्रभावी साबित हो सकता है, लेकिन रचनात्मकता, जटिल कानूनी व्याख्या या सामाजिक-आर्थिक निर्णय जैसे क्षेत्रों में इसकी सीमाएं स्पष्ट हैं। वित्तीय सलाह, कर तैयारी और नियमित कानूनी कार्यों में एआई के प्रवेश को लेकर भी बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में पहले से ही आंशिक स्वचालन मौजूद है और मानवीय विवेक की भूमिका पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकती।

इस मामलें में कृषि क्षेत्र का उदाहरण देकर विशेषज्ञ बताते हैं कि यह उद्योग पहले से ही अत्यधिक कंप्यूटरीकृत और एल्गोरिदम-आधारित है।
जलवायु डेटा विश्लेषण, बुवाई और कटाई के समय का निर्धारण तथा जीपीएस-संचालित मशीनरी ये सभी तकनीक पहले से लागू हैं। इसके बाद यह तर्क कि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग कृषि की ओर लौटे सकते हैं, वास्तविक आर्थिक ढांचे की जटिलताओं को नजरअंदाज करता है। समग्र रूप से आशंका है कि यदि एआई कंपनियों का मूल्यांकन अपेक्षाओं पर आधारित रहा और लाभप्रदता में देरी हुई, तब निवेश का बुलबुला फूट सकता है। इससे तकनीकी क्षेत्र के साथ व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी असर पडऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

उषा भार्गव कांड में डॉ. व्ही.व्ही. श्रीवास्तव की गवाही मंंडला में दर्ज कराई गई थी
Author: Jai Lok






