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चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो,हम भी तैयार…

(जय लोक)। 70 के दशक में ‘कमाल अमरोही’ द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्म ‘पाकीजा’ आई थी। मीना कुमारी और राजकुमार के अभिनय ने फिल्म को सुपर हिट बना दिया था। इस फिल्म का एक बड़ा मशहूर गीत था ‘चलो दिलदार चलो चांद के पार चलो, हम भी तैयार चलो’ नासा के आर्टेमिस मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब पहुंचने का ऐतिहासिक सफर पूरा कर सुरक्षित लौट आए, बताया जाता है कि 2028 में आर्टेमिस चार के तहत नासा चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर दो इंसानों को उतारेगी यानी  जो कल्पना कई बरस पहले कमाल अमरोही ने की थी और आशिक और महबूबा चांद पर चलने की बात कह रहे थे वो सार्थक सिद्ध होने वाली है।

नासा का कहना है कि चांद का रास्ता खुल चुका है आगे और बड़ा काम होगा, अभी तक तो चांद को खूबसूरती का पर्याय माना जाता था न जाने कितने गीत चांद पर बनाए गए हैं यहां तक की महबूबा की खूबसूरती पर एक गीतकार ने तो ये तक लिख दिया ‘चांद आहें भरेगाफूल दिल थाम लेंगे हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे’ फिर एक गीतकार और आगे बढ़ गए कहा ‘चांद सी महबूबा होगी मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था हां तुम बिलकुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था’ जब पूनम की रात होती है तब चांद की खूबसूरती देखने लायक होती है इसलिए शायद चांद को हुस्न का पैमाना माना जाता है लेकिन इंसान इस चांद को भी रौंदने के लिए तैयार है अरे भैया धरती क्या कम है जो तुम चांद पर पहुंच रहे हो और अगर पहुँच भी रहे हो तो चुपचाप अध्ययन करके आ जाओ अब वहां इंसानों को उतारोगे वे वहां गंदगी करेंगे तो चांद बेचारा कर भी क्या लेगा, वो तो ये सोचता था कि हम तो कई लाख मील दूर है इस पृथ्वी से कोई हम तक नहीं पहुंच पाएगा लेकिन इंसान कहां पीछे हटने वाला वो तो अच्छा हुआ कि सूरज में इतनी गर्मी है वरना वो सूरज तक भी पहुंचने की कोशिश कर लेता मंगल, शुक्र, गुरु सब की दहलीज पर अपने पांव रखने के लिए इंसान तैयार हो रहा है खबर तो ये भी लगी है कि कुछ उद्योगपति, बिल्डर चांद से भी प्लाट बेचने के चक्कर में हैं।

अपने को तो लगता है कि जिस तरह से इंसान चांद को अपने कब्जे में करने की कोशिश कर रहा है वो दिन दूर नहीं जब वहां भी जाम लगने लगेगा, ठेले टपरे ठुकने लगेंगे अतिक्रमण का जाल फैल जाएगा सब्जी भाजी की दुकानें खुल जाएंगी दारू के ठेके चलने लगेंगे  और बेचारा चांद अपनी पुरानी खूबसूरती को याद करते हुए यही गाना गाएगा ‘याद न जाए बीते दिनों की दिल क्यों बुलाए उन्हें।

ग्रहों का चक्कर
विजयराघवगढ़ के अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक के ग्रह इन दोनों बहुत खराब चल रहे हैं लगता है राहु, शनि, केतु सब एक साथ उन पर हमला करने के लिए तैयार बैठे हैं। एक जमाना था जब संजय पाठक का कांग्रेस में जलजला हुआ करता था बाद में भाई साहब कांग्रेस से कुलाटी खाकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए सोचा वही जलवा बीजेपी में भी बना रहेगा लेकिन लगता है जब से बीजेपी में आए हैं उनके गृह नक्षत्र कुछ गड़बड़ा से गए हैं जिस पार्टी का दामन थामा था उसी ने चार सौ करोड़ से ज्यादा का जुर्माना अवैध उत्खनन को लेकर जड़ दिया, इधर हाईकोर्ट के एक जज को फोन करने के मामले में भी भाई जी अलसेट खा गए माफी भी माँग ली लेकिन न्यायालय ने इसको गंभीरता से लिया और आगामी दिनों में फिर पेशी होने वाली है।

कहते हैं ये जीवन चक्र है इंसान ऊंचाई पर चला जाता है तो फिर उसे कभी ना कभी नीचे आना ही पड़ता है। आप हिमालय पर चढ़ जाओ, एवरेस्ट पर चढ़ जाओ लेकिन फिर वापस भी वही आना पड़ता है, यही लगता है कि संजय पाठक के साथ हो रहा है अपनी तो उनको एक ही सलाह है कि  भैया किसी अच्छे ज्योतिषी या तांत्रिक को अपनी कुंडली दिखाओ कुछ उपाय करवाओ, राहु शनि का जाप करवा लो हो सकता है इससे कुछ शांति महसूस हो सके वरना जो कुछ भोग रहे हो सकता है आगे भी भोगना पड़ जाए क्योंकि यदि ग्रह नक्षत्र नाराज हो गए तो फिर उनके कोप से कोई बचा नहीं पाता सिर्फ ईश्वर का ही एक सहारा बचता है जो इन उधम करने वाले ग्रहों को ठीक कर सकता है दो तीन तीर्थ स्थल पर हो आओ, कुछ ज्योतिर्लिंगों का भ्रमण कर लो शायद इसका कुछ फायदा मिल जाए अपन ने तो सलाह दे दी अब भाई साहब माने या ना माने उनकी मर्जी

मोहब्बत हो तो ऐसी
जबलपुर के पास सिहोरा में एक आशिक ने अपनी महबूबा से शादी की मांग को लेकर एक ऐसी तरकीब लगाई कि प्रेमिका के परिवार वालों को भी शादी के लिए राजी होना पड़ा। जब महबूबा के घर वाले शादी के लिए नहीं मान रहे थे तो भाई साहब ‘शोले के धर्मेंद्र’ की तर्ज पर हाई टेंशन लाइन के टावर पर चढ़ गए, उनकी एक ही मांग थी कि उनकी महबूबा को बुलाया जाए वो शादी का वादा करे तभी वे इस टावर पर से उतरेंगे, पुलिस को खबर दी गई पुलिस बेचारी करती तो क्या करती समझाती रही, बोलती रही, बिजली विभाग  वाले भी आ गए वे भी समझाते रहे कि भैया बहुत रिस्की है ये काम हाई टेंशन लाइन में अपनी जान आफत में मत डालो लेकिन कहते हैं ना कि जो इश्क करता है वो दिमाग से नहीं बल्कि दिल से इश्क करता है और जब दिल से इश्क करता है तो दिमाग काम करना बंद कर देता है

यही हाल उस आशिक का हो रहा था तीन घंटे तक पुलिस उसको समझाती रही कि उतर आओ लेकिन भाई साहब उतरने तैयार नहीं अंत में उनकी महबूबा को बुलाया गया उसने शादी के लिए हामी भारी तब जाकर भाई साहब हाई टेंशन लाइन के टावर पर से उतर के नीचे आए इधर वे टावर से उतरे पुलिस ने उनको धर दबोचा अब महबूबा से उनकी शादी होगी या नहीं होगी ये तो वक्त बताएगा लेकिन इसको कहते हैं मोहब्बत की इंतहा, इसलिए लैला मजनू, हीर रांझा, शीरी फरहाद जैसे मोहब्बत के मारो को लोग आज भी याद करते हैं देखना ये होगा कि उस आशिक की तरकीब काम कर पाएगी या नहीं यह तो वक्त बताएगा जब उनकी बारात उनके महबूबा के घर पहुंचेगी।

सुपर हिट ऑफ द वीक
‘तेरी बीबी कुछ कहती नहीं जब तुम दारू पीकर घर जाते हो’ श्रीमान जी के दोस्त ने उनसे पूछा
‘कहती नहीं बोलती है’
‘क्या बोलती है’ दोस्त ने फिर पूछा
‘बोलती है कीड़े पड़ेंगे तुम्हारे दोस्तों को, कुत्तों की मौत मरेंगे साले जिन्होंने तुम्हें बिगाड़ा है’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।

 

हंगामा फेस्ट में पुलिस की कार्यवाही, डीजे जप्त आयोजकों पर भी एफआईआर

Jai Lok
Author: Jai Lok

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