
जबलपुर (जयलोक)। नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार में एक कैदी द्वारा फाँसी लगाकर जान देने का मामला सामने आया है। जिसकी खबर फैलते ही जेल परिसर में हडक़ंप मच गया। कैदी ने जेल परिसर के भीतर ही फाँसी लगाकर जान दी। कैदी का शव फाँसी पर झूलता हुआ पाया गया है। बताया जा रहा है कि कैदी ने शौचालय में फाँसी लगाकर जान दी है।
जेल के अस्पताल खंड के वार्ड नंबर 3 में स्थित शौचालय के भीतर बंदी ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक बंदी की पहचान गुड्डू उर्फ राजा के रूप में हुई है जो लंबे समय से जेल में निरुद्ध था। मृतक 16 अगस्त 2024 से जेल में बंद था, उस पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था और वह संजीवनी नगर का निवासी था। घटना का पता चलते ही जेल प्रहरियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। केंद्रीय जेल प्रशासन ने प्रोटोकॉल के तहत स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना दे दी है। पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल बंदी द्वारा उठाए गए इस आत्मघाती कदम के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। जेल प्रबंधन और पुलिस विभाग अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि बंदी तक फांसी लगाने की सामग्री कैसे पहुँची और अस्पताल वार्ड में उसकी निगरानी में क्या चूक हुई। घटना की जानकारी मजिस्ट्रेट को दे दी गई है और मृतक के परिजनों को भी सूचित कर दिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जेल के भीतर एक बंदी इस तरह फांसी लगाने में कैसे सफल हो गया। मामले की जांच जेल प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है।

काफी समय से था परेशान
इस संबंध में जेलर मदन कमलेश ने बताया कि कैदी राजा काफी समय से परेशान था। वह 2024 में जेल में आया था उसका कहना था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। इसके साथ ही उसकी जमानत भी नहीं हो रही थी। जिससे वह परेशान रहने लगा था। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसके आधार पर सिविल लाइन पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

इनका कहना है
आज सुबह एक कैदी ने टावल से फाँसी लगाकर आत्महत्या की है। मृतक काफी दिनों से परेशान था और वह अक्सर अन्य कैदियों से कहता था कि उसे झूठा फंयाया गया है। इसके साथ ही जमानत ना होने से भी वह परेशान था।
मदन कमलेश,
जेलर

Author: Jai Lok






