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तीन हिस्सों में बंटेगा आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर को मिलेंगे 14 जिले

जबलपुर (जयलोक)। शहर के साथ फिर भेदभाव होने जा रहा है। मध्य प्रदेश की एकमात्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी की जा रही है। जिसके बाद जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने का नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिसमें सरकार पर हर साल करोड़ों को आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। इस विभाजन के बाद जबलपुर के अधिकार क्षेत्र में केवल 14 जिले ही शेष रह जाएंगे। इनमें रीवा, सतना, सिंगरौली, शहडोल, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी, सीधी, पन्ना और टीकमगढ़ शामिल हैं। दूसरी ओर, भोपाल और उज्जैन की नई प्रस्तावित यूनिवर्सिटी को 18-18 जिलों का बड़ा और समृद्ध कार्यक्षेत्र सौंपने की तैयारी की जा रही है।

150 करोड़ रूपये का हर साल खर्च- यूनिवर्सिटी को तीन हिस्सों में बांटने से प्रदेश सरकार पर हर साल 120 करोड़ रूपये का आर्थिक बोझ भी आएगा। वर्तमान में संचालित अकेली मेडिकल यूनिवर्सिटी विभिन्न संबद्धता शुल्क, परीक्षा फीस, नामांकन और प्रकाशन जैसे माध्यमों से हर साल लगभग 70 से 75 करोड़ रुपए की अच्छी-खासी आय कमा लेती है। इसके सुचारू संचालन पर सालाना औसतन केवल 30 से 40 करोड़ रुपए ही खर्च होते हैं।

लेकिन यदि तीन यूनिवर्सिटी का नया ढांचा जमीन पर उतरा, तो नए भवनों के निर्माण, प्रशासनिक अमले की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं के कारण यह खर्च बढक़र सीधे 150 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच जाएगा। यानी वर्तमान व्यवस्था की तुलना में राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय घाटे का बोझ लाद दिया जाएगा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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