
बिजली गुल पर उठा सवाल-कहा का मेंटेनेस कौन सा मेंटेनेस? घंटों आधा शहर डूबा रहा अंधेरे में
जबलपुर (जयलोक)। प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर नगर सत्ता के लोग यह दावा करते हैं कि जबलपुर महानगर का स्वरूप ले रहा है। लेकिन प्री मानसून की दूसरी झड़ी ने कल यह साबित कर दिया कि जबलपुर की स्थिति आज भी किसी कस्बे से अधिक नहीं है। मानसून तो अभी आया भी नहीं है केवल उसकी दस्तक हुई है और जरा सी तेज हवाएं और पानी की तेज बौछार शहर के पूरे बिजली तंत्र को ठप्प कर देती है।

यह उनके लिए शर्म की बात है जो जबलपुर को महानगर होने का दावा कर रहे हैं या फिर उस बिजली विभाग की विभिन्न कंपनियों के लिए जो अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी मेंटेनेंस के नाम पर केवल आम जनता को ठेंगा दिखा रहे हैं और यह स्थिति निर्मित हो रही है कि तेज हवाएं और पानी तो 20 -25 मिनट गिरता है लेकिन आधे शहर की बिजली घंटों तक के लिए गुल हो जाती है।
हावी है अफसर शाही- स्थिति इतनी खराब है कि कल आसमान से पानी गिर रहा था लेकिन शर्म का पसीना भाजपा नेताओं के चेहरे से टपक रहा था। जिन क्षेत्रों में घंटों से बिजली गुल थी और बिजली विभाग के दफ्तरों की केवल फोन की घंटियां बजती रहीं। अधिकारियों ने फोन पहले तो उठाना बंद कर दिए बाद में साइलेंट मोड में डाल दिए। आम जनता जब बे हिसाब तरीके से परेशान हो गई तो उन्होंने अपने परिचित सत्ता पक्ष भाजपा के लोगों को, जनप्रतिनिधियों को, नेताओं को फोन लगाना प्रारंभ किया। लेकिन बड़े शर्म की बात तो तब नजर आई जब भाजपा के कई दिग्गज कहे जाने वाले नेताओं के भी अधिकारियों ने फोन नहीं उठाये। बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा लोग पूरी दोपहर से देर रात तक भुगतते रहे।

बुजुर्ग-बच्चे हुए परेशान
बिजली कर्मचारियों की लापरवाही से बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है जो कल घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर थे। लेकिन यह तो अभी शुरूआत है। बारिश की मौसम आने में कुछ दिन ही शेष रह गए हैं लेकिन उसके पहले ही बिजली विभाग की पोल खुल गई। जरा सी बारिश और आंधी में घंटों बिजली गुल हो रही है। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में ज्यादा परेशानी हो सकती है।


बजते रहे फोन
– वहीं दूसरी ओर घंटो लाइट गुल रहने पर उपभोक्ता बिजली विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को फोन लगाते रहे। शिकायत केन्द्र के भी फोन घंटों बजते रहे लेकिन किसी भी अधिकारी कर्मचारी ने उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने में रूचि तक नहीं दिखाई।
मेंटनेंस पर लाखों खर्च- बारिश पूर्व हर वर्ष बिजली विभाग मेंटनेंस के नाम पर लाखों रूपया पानी की तरह बहाता है। वहीं उपभोक्ताओं से बड़े बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन जरा सी बारिश और आंधी से उनके दावों की पोल खुल जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो और भी बुरे हालात हैं यहां तो कई घंटों तक अंधेरा छाया रहता है। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
Author: Jai Lok






