
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन इसे सबसे ज्यादा गलत समझा जाता है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि बाहर से देखने पर संघ लोगों को अलग-अलग तरह का दिखाई देता है।

भागवत ने कहा- कुछ लोग इसे अर्धसैनिक संगठन समझ लेते हैं, जबकि भारतीय खेलों और पारंपरिक युद्ध कलाओं को बढ़ावा देने के कारण कुछ लोगों को यह एक बड़े जिम जैसा लगता है।
उन्होंने कहा कि संघ को बाहर से देखकर पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। आरएसएस को समझने का सबसे अच्छा तरीका उसके साथ जुडऩा और उसके काम को करीब से देखना है।

भागवत ने कहा कि आरएसएस किसी खास परिस्थिति की प्रतिक्रिया में नहीं बना था और न ही यह किसी समाज, समुदाय या राजनीतिक दल के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संघ के बारे में लोगों में कई गलतफहमियां हैं। इसलिए शताब्दी वर्ष के दौरान आरएसएस लोगों तक पहुंचकर संगठन और उसके कामकाज के बारे में जानकारी दे रहा है। भागवत के मुताबिक, संघ की स्थापना देशहित और समाज सेवा के उद्देश्य से हुई थी और वह आज भी उसी दिशा में काम कर रहा है।


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Author: Jai Lok






