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जर्जर नहीं था मकान, पड़ोसी के मकान तोडऩे से गिरा हिस्सा: तीसरा मकान भी तोड़ा जाएगा बड़ा  फुहारा हादसा चिन्हित हंै 22 जर्जर मकान   कुछ पर स्टे, बाकी तोड़े जाएँगे

रात भर जुटी रही नगर निगम और पुलिस की टीम, घटनास्थल पर मौजूद निगम आयुक्त और अन्य अधिकारी, रास्ता बंद : मशीनें कर रहीं अपना काम

जबलपुर (जयलोक)। मंगलवार रात को बड़ा फुहारा के पास गिरे तीन मंजिला इमारत के ढहने के बाद देर रात से ही नगर निगम प्रशासन मकान के मलबे को हटाने में जुट गया था। मौके पर पहुँचे वरिष्ठ अधिकारियों ने यह पाया कि जो मकान कल धराशाही हुआ है वह जर्जर नहीं था बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा अपने हिस्से का बगल का मकान तोड़े जाने से उक्त भवन का सहारा खत्म हो गया था और वह इसी वजह से गिरा है। अब सुरक्षा की दृष्टि से धराशायी हुए मकान के पीछे हवा में झूल रहे चार मंजिला भवन को भी गिराने की प्रक्रिया की जाएगी। इस संबंध में नगर निगम ने भवन स्वामी को नोटिस देकर भवन खाली करवा लिया गया था।
कल हादसे के बाद से ही जिला प्रशासन नगर निगम और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाही करते हुए अपनी कार्रवाही प्रारंभ कर दी थी। रास्ते को दोनों तरफ से बंद कर धराशाही हुए मकान के सामने मलबा गिराकर रैंप बनाया गया और फिर सुबह से ही बचे हुए खतरनाक हिस्से को गिराने और मलबा हटाने का कार्य जारी है।
आज सुबह से ही नगर निगम और पुलिस की टीमें पूरी तरह सक्रिय दिखीं और तेजी से बचे हुए जर्जर हिस्से को भी तोड़ा जा रहा है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए कमानिया गेट से लार्डगंज की ओर जाने वाले रास्ते को सुरक्षा कारणों से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इमारत का सामने का हिस्सा पहले ही गिर चुका है, लेकिन पिछला हिस्सा खड़ा होने से बड़ा खतरा बना हुआ है। इमारत की अधिक ऊंचाई के कारण सामान्य मशीनों को वहां तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए निगम ने एक अनूठा रास्ता निकाला है। भवन के सामने वाली जगह पर ट्रकों से लगातार मलबा और मिट्टी डलवाकर एक मजबूत अस्थायी प्लेटफार्म तैयार किया गया। जिसके बाद हिताची मशीन उस पर चढक़र ऊंचाई तक पहुंच कर कार्य कर पा रही है।

इसलिए कमजोर हुई इमारत

भवन स्वामी राजा जैन का कहना है कि बिल्डिंग बहुत पुरानी नहीं थी, यह कंस्ट्रक्शन 30 साल पुराना ही था। लेकिन इस इमारत के दोनों तरफ  जो इमारतें थी उन्हें पुनर्निर्माण के लिए तोड़ दिया गया था। बीच में यही एक बिल्डिंग थी, हालांकि उन्हें बिल्कुल जानकारी नहीं है कि बिल्डिंग कैसे गिर गई, लेकिन फिर भी उनका अंदाजा है की बिल्डिंग के दोनों तरफ  बनी हुई दूसरी इमारत के टूट जाने की वजह से बिल्डिंग का सपोर्ट खत्म हो गया था। हो सकता है इस वजह से यह बिल्डिंग गिर गई हो।

जर्जर भवनों से बना खतरा

शहर में ऐसे कई जर्जर भवन है जो बारिश में लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। कल रात के बाद जिस तरह एक चार मंजिला भवन गिरा है उसे देखते हुए अब नगर निगम अन्य भवनों को तोडऩे की कार्रवाही करेगा। जानकारी के अनुसार शहर में अभी 22 जर्जर भवन ऐसे हैं जिन्हें तोडऩा जरूरी हो गया है। इनमें से कुछ पर न्यायालय द्वारा स्टे दिया गया है। जिसके संबंध में प्रशासन जानकारी एकत्रित कर रहा है। अन्य चिन्हित भवनों को सुरक्षा की दृष्टि से गिराने की कार्रवाही जल्द की जाएगी। नगर निगम द्वारा बारिश के पूर्व से ही ऐसे जर्जर भवनों को चिन्हित कर तोड़े जाने का कार्य किया जा रहा है।

 70 फीट तक के भवन

इस इलाके में भवन निर्माण से जुड़े नियमों का पालन ही नहीं किया जाता, यहां माचिस की डिब्बी की तरह घर बने हुए हैं और कंस्ट्रक्शन भी बहुत कमजोर होता है। यहां कई इमारतों की ऊंचाई 70 फीट तक हैं लेकिन इन इमारतों के नक्शे तक पास नहीं है। ऐसी हालत में ऐसी दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। लेकिन पुरानी इमारतें होने की वजह से नगर निगम भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं करता।

आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोंपरि-महापौर

शहर के व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्र बड़ा फुहारा में हुई मकान ढहने की घटना को लेकर एक बड़ा हादसा टला है। इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू एवं निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के मार्गदर्शन में नगर निगम द्वारा जनहित और नागरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।  कल रात भी निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद थे।

सुरक्षा को लेकर नगर निगम गंभीर, जारी किए जा रहे नोटिस

महापौर और निगमायुक्त के कड़े निदेर्शों के बाद नगर निगम की टीमें शहर भर में सक्रिय हो गई हैं। मॉनसून और जनसुरक्षा के मद्देनजर शहर के सभी क्षेत्रों में वास्तव में जर्जर और खतरनाक हो चुके भवनों को तेजी से चिन्हित किया जा रहा है। यदि आपके आस-पास कोई ऐसा भवन या निर्माण है जो जर्जर हो चुका है और जिससे आम जनता को खतरा हो सकता है, तो आप इसकी सूचना सीधे नगर निगम को दे सकते हैं।

इन जगहों पर हैं जर्जर भवन

शहर की पुरानी बसाहट बड़ा फुहारा, कोतवाली, मिलौनीगंज, दीक्षितपुरा, कमानिया गेट, दरहाई, सराफा के अलावा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे दो दर्जन से अधिक जर्जन भवन हैं होने की जानकारी सामने आई है। जिन्हें तोड़ा जाना जरूरी है। ये भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। इसके साथ ही इन भवनों से आसपास बने भवनों को भी खतरा बना हुआ है। अभी तो बारिश की शुरूआत है अगर समय रहते इन भवनों को तोड़ा नहीं गया तो जान माल दोनों का नुकसान हो सकता है।

पूर्व में हुए हादसों से नहीं लिया सबक

पूर्व में हुए हादसों से अब तक कोई सबक नहीं लिया गया। पाँच साल पहले घमापुर क्षेत्र के बरउ मोहल्ले में एक मकान का छज्जा गिरने से कए ही परिवार के तीन सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं आठ साल पहले हनुमानताल के साठिया कुआँ में दो मंजिला पुराना मकान गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी। 23 अगस्त 2022 को करमचंद चौक के पास सुबह एक जर्जर मकान का दो मंजिला का छज्जा व सीढ़ी सहित अधिकांश हिस्सा भरभरा कर गिर गया। दूसरी मंजिल पर परिवार के सात लोग फंस गए थे। गनीमत रही कि आस-पास के रहवासियों ने आनन-फानन में नगर निगम के कंट्रोल रूम में सूचना दी और निगम के फायर ब्रिगेड के अमले ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सभी रेस्क्यू कर सात लोगों को सुरक्षित निकाल लिया और बड़ा हादसा टल गया। इसके अलावा शहर में पूर्व में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं जो जर्जर भवनों को गिराने के लिए बड़ा उदाहरण हैं।

इनका कहना है

सुरक्षा की दृष्टि से जर्जर भवनों को समय रहते चिन्हित कर सुरक्षित रूप से ध्वस्त किए जाने की कार्रवाही लगातार की जा रही है। कल जो हादसा हुआ है वह भवन जर्जर नहीं था, लेकिन उसमें आजूबाजू के मकान खुद से भवन स्वामियों द्वारा तोड़े जाने के कारण उक्त भवन का सपोर्ट समाप्त हो जाने के कारण हुआ है। नगर निगम लगातार अपनी कार्रवाही कर रहा है। आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वपरि है जहां भी ऐसा खतरा प्रतीत होगा निगम अपनी कार्रवाही करेगा।
रामप्रकाश अहिरवार, निगमायुक्त

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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