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पत्थरों में नाम तो मिल गए मगर  दिल नहीं मिल रहे, भूमि पूजन    लोकार्पण में अनदेखी की मची होड़

परितोष वर्मा।
जबलपुर (जय लोक)। दशकों पुरानी यह कहावत राजनीति में जो दिखता है वह होता नहीं और राजनीति में जो जिसके साथ नजर आता है उसका होता नहीं। यह कहावत वैसे तो राजनीतिक घटनाक्रमों के अलग-अलग पड़ाव पर अलग-अलग परिपेक्ष में सटीक बैठती है लेकिन वर्तमान में यह कहावत शिलान्यास के पत्थरों पर भी सटीक बैठ रही है। शिलान्यास के काले पत्थरों में सुनहरे अक्षरों से लिखे माननीय जनप्रतिनिधियों के नाम साथ-साथ तो नजर आते हैं लेकिन दिलों में दूरी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी का परिणाम है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग विधानसभाओं में अलग-अलग वार्डों में होने वाले भूमि पूजन या फिर लोकार्पण के कार्यक्रमों में जिस नेता का जैसा समय पड़ता है वह अपनी तरकश से अनदेखी का तीर सामने वाले पर दाग देता है।
वर्तमान में सभी जनप्रतिनिधि यह मानकर चल रहे हैं कि आने वाले चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। अपने-अपने क्षेत्र में सब अपने-अपने नाम का अधिक से अधिक पत्थर लगाने की जुगत में लगे हुए हैं। जो भी कार्य हो रहे हैं वह सब सरकारी हैं लेकिन श्रेय लेने में कोई भी नेताजी पीछे नहीं हटाना चाहते। एक तरीके से यह बिल्कुल सही भी है कि जिनके प्रयासों से जो कार्य हुआ है उसे पर उसके नाम का शिलान्यास का पत्थर लगवाने की परंपरा भी सदियों पुरानी है।

लेकिन अजब गजब बात यह है कि बहुत सारे विधानसभा क्षेत्र में नाली निर्माण से लेकर भवन निर्माण आदि तक के कार्यों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्था नगर निगम के पदाधिकारियों को भी नजर अंदाज करने की जुर्रत दिखाने का चलन चल पड़ा है। नगर संगठनों के कानों में भी इस तरीके की निम्न स्तरीय राजनीति की उठापटक की धमक पहुँच रही है।
सूत्रों के अनुसार कुछ स्तर पर सभी के बीच समन्वय बनाते हुए यह संदेश भी दिया गया कि यह वक्त आपस में लडऩे और खींचतान करने का नहीं है बल्कि श्रेय बांटकर एक दूसरे के नंबर बढ़ाते हुए आगे चलने का है।
लंबे समय से सत्ता में रही भाजपा के नेताओं में भी कांग्रेस के नेताओं जैसे पूरे गुण आत्मसात हो गए हैं। हर कोई स्वयं को सबसे बड़ा नेता मानकर चल रहा है। सब खुद को सर्वाधिक प्रभावशाली मान रहे हैं। नजरों के लिहाज में सब एक दूसरे को सम्मान दे रहे हैं मगर अंदर ही अंदर फूटी आंख एक दूसरे को हजम नहीं कर पा रहे हैं।

बाहर जाने का तलाशा जा रहा मौका
सूत्रों ने बताया कि बहुत सारे क्षेत्र में भूमि पूजन लोकार्पण के कार्यक्रमों को निर्धारित करने के लिए भी हर प्रकार की रणनीति अपनाई जा रही है। जो नेता दूसरे नेता को अपने साथ इन कार्यक्रमों में शामिल करने की मंशा नहीं रखता वह इस बात की भी प्रतीक्षा कर नजर बनाए रखता है कि कौन सा नेता कब शहर से बाहर जा रहा है।

अधिकारियों की सर्वाधिक मरण
इस राजनीतिक खींचतान के बीच सर्वाधिक परेशानी उन अधिकारियों के समक्ष खड़ी हो जाती है जो ना तो अपने जनप्रतिनिधि को मना कर पाते हैं और ना दूसरे जनप्रतिनिधियों को इनकार कर सकते हैं। इस श्रेय लूटने की रस्साकशी में सर्वाधिक परेशानी इन्हीं संबंधित अधिकारियों के समक्ष खड़ी होती है।

प्रथम नागरिक का बड़ा दिल
इस प्रकार के मामलों में विभिन्न प्रकार की चर्चाओं के बीच शहर के प्रथम नागरिक अच्छा उदाहरण देते नजर आते हैं। वे अपने अधीनस्थ सभी लोगों को यह कहते हैं कि शिलान्यास, लोकार्पण, भूमि पूजन कार्यक्रम चाहे जो भी हो परंपरा के अनुसार जो व्यवस्थाएं चली आ रही हैं उसके अनुरूप क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर सूचित कर यह कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
महापौर स्पष्ट रूप से कहते हैं कि शहर के सीमा के अंतर्गत होने वाले हर काम में नगर निगम का महत्वपूर्ण योगदान है। कार्य किसी भी मद से हो इसका लाभ जनता को मिलता है। नगर निगम विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर पूरा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। लोगों को विकास की सौगात देने के लिए प्रदेश सरकार व नगर सरकार प्रतिबद्ध नजर आती है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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