
नई दिल्ली (जयलोक)। हिंद महासागर में भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। भारतीय नौसेना के लिए खरीदे जा रहे अत्याधुनिक राफेल-एम लड़ाकू विमानों की तैनाती के करीब आने के साथ ही पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। उनका मानना है कि विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर राफेल-एम की तैनाती के बाद भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, भारत की ताकत केवल राफेल-एम विमानों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके साथ काम करने वाला पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर में बड़ी रणनीतिक बढ़त देगा। इसमें विमानवाहक पोत के अलावा आधुनिक डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, पनडुब्बियां, सपोर्ट शिप, लंबी दूरी के रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क शामिल होते हैं। भारत ने नौसेना के लिए फ्रांस से २६ राफेल-एम लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया है। ये विमान विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन और समुद्री अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं। इनमें आधुनिक सेंसर, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियार शामिल हैं। इसकी मेटर बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल क्षमता इसे और प्रभावी बनाती है, जिससे दुश्मन के विमान को दूर से ही निशाना बनाया जा सकता है।
पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में चीन से जे-१०सीई मल्टीरोल लड़ाकू विमान खरीदे हैं। हालांकि, पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, हथियार प्रणाली और समुद्री संचालन क्षमता के मामले में राफेल-एम भारतीय नौसेना को बढ़त दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संघर्ष का परिणाम केवल एक विमान पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सैन्य रणनीति, प्रशिक्षण और संसाधनों के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। भारत की नौसैनिक रणनीति केवल विदेशी विमानों तक सीमित नहीं है। स्वदेशी ट्विन इंजन डेक आधारित फाइटर कार्यक्रम पर भी काम जारी है, जिसे भविष्य में नौसेना के मौजूदा लड़ाकू विमानों के विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा बड़े विमानवाहक पोत की योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
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Author: Jai Lok






