
मामला हाईकोर्ट पहुँचा, बुधवार को होगी सुनवाई
जबलपुर (जय लोक)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह ने व्हाटसअप एलएलसी द्वारा उनके दो अकाउंट कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना और कारण बताए ब्लॉक किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि पहले उनका मुख्य व्हाटसअप अकाउंट प्रतिबंधित किया गया और वकालत का काम प्रभावित होने पर नया नंबर लेने के बाद 4 अक्टूबर 2026 को दूसरा अकाउंट भी ब्लॉक कर दिया गया। याचिका में इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और इन्फार्मेशन टेक्नॉलजी नियम 2021 के तहत उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था के विपरीत बताते हुए दोनों अकाउंट तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी।
बिना नोटिस अचानक ब्लॉक किया अकाउंट
याचिका के मुताबिक, सीनियर एडवोकेट मृगेंद्र सिंह लंबे समय से अपने प्राथमिक व्हाटसअप नंबर का इस्तेमाल पेशेवर और कानूनी कामकाज के लिए कर रहे थे। आरोप है कि व्हाटसअप ने बिना कोई पूवज़् सूचना दिए और प्रतिबंध का स्पष्ट कारण बताए अचानक इस अकाउंट को ब्लॉक कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्हें न तो कोई शो-कॉज नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
नया नंबर लिया तो उसे भी कर दिया ब्लॉक
याचिका में कहा गया है कि पहला अकाउंट ब्लॉक होने से वकालत से जुड़े कामकाज और आवश्यक संवाद में परेशानी आने लगी। इसके बाद उन्होंने नया सिम लेकर दूसरा व्हाटसअप अकाउंट बनाया। आरोप है कि 4 अक्टूबर 2026 को व्हाटसअप ने नए अकाउंट को भी प्रतिबंधित कर दिया। लगातार दो अकाउंट ब्लॉक किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
कानूनी नोटिस भेजा, फिर भी अकाउंट बहाल नहीं होने का दावा
याचिका के अनुसार अधिवक्ता घूंचा रसूल के माध्यम से व्हाटसअप के गुरुग्राम स्थित ग्रीवांस ऑफिसर को कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसमें 48 घंटे के भीतर अकाउंट बहाल करने और अकाउंट ब्लॉक किए जाने से संबंधित तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि इस नोटिस के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। याचिका का प्रमुख आधार प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का कथित उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना कारण बताए, बिना नोटिस दिए और बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किए अकाउंट प्रतिबंधित किया गया।
वकालत के काम पर असर पडऩे का दावा
याचिका में कहा गया है कि मौजूदा दौर में वकीलों के लिए इंस्टेंट मैसेजिंग पेशेवर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। मुकदमों से संबंधित सूचनाओं, दस्तावेजों और मुवक्किलों से संपर्क सहित कई आवश्यक संवाद इसके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में अचानक व्हाटसअप अकाउंट बंद होने से पेशेवर कामकाज प्रभावित होने का दावा किया गया है। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 21 और त्वरित न्याय से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में भी उठाया गया है।
अब हाईकोर्ट में तय होगी आगे की दिशा
याचिका में लगाए गए आरोपों पर अभी अदालत द्वारा अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है। मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा अकाउंट प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और पेशेवर उपयोगकर्ताओं पर उसके प्रभाव से जुड़े सवाल हाईकोर्ट के सामने रखता है। अब मामले में अदालत के समक्ष आने वाले पक्षों के जवाब और हाईकोर्ट के आदेश से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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Author: Jai Lok





