
होम लोन समेत सभी खुदरा लोन की बढ़ेगी ईएमआई
रेपो रेट में यह बढ़ोतरी फरवरी, 2023 के बाद पहली बार की गई
नई दिल्ली (जयलोक)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लगातार बढ़ी रही खाद्यान्यों पर महंगाई को काबू करने के लिए आखिरकार साढ़े तीन साल बाद (43 महीने) रेपो रेट बढ़ा ही दिया। महंगाई और ग्लोबल मार्केट के तमाम दबाव के बावजूद अभी तक आरबीआई ने इसे काबू में रखा था, लेकिन बुधवार को आखिरकार इसमें 0.25 फीसदी रेट बढ़ा दिया है। अब रेपो रेट बढक़र 5.50 फीसदी पहुंच गया है, जो अभी तक 5.25 फीसदी रहा था। रेपो रेट बढऩे से होम लोन, ऑटो लोन समेत अन्य सभी तरह के खुदरा लोन की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर मकान खरीदारों पर पड़ेगा।
आरबीआई गवर्नर ने पिछले तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बुधवार को इसके फैसलों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि महंगाई के दबाव में आखिरकार रेपो रेट को बढ़ाना पड़ रहा है। गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान किया और अब प्रभावी रेपो रेट बढक़र 5.50 फीसदी पहुंच गया है। इसका सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन समेत अन्य सभी तरह के खुदरा कर्ज पर पड़ेगा, क्योंकि अब ज्यादातर बैंकों की ब्याज दरें रेपो रेट से ही जुड़ी होती हैं। रेपो रेट में यह बढ़ोतरी फरवरी, 2023 के बाद पहली बार की गई है।
गवर्नर ने बताया कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ की दरों को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी को 5.75 फीसदी पर बनाए रखा है। आरबीआई ने ब्याज दरों को बढ़ाने के साथ ही अपने रुख को भी न्यूट्रल से बदलकर सख्त कर दिया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में अगर महगाई की ब्याज दरें नहीं सुधरीं तो रेपो रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि ग्लोबल मार्केट में जारी उठापटक और घरेलू बाजार में ईंधन महंगा होने के बाद खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का दबाव बढ़ा दिया है। इसी दबाव के कारण साढ़े तीन साल बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाना पड़ा है। चीनी और प्याज जैसी जरूरी चीजों के दाम बढऩे से खुदरा महंगाई का अनुमान भी अगस्त में बढक़र 4.8 फीसदी पहुंच गया है। जुलाई में यह अनुमान 4.50 फीसदी रहा था। हालांकि, भारत की विकास दर का अनुमान और बेहतर हुआ है और चालू वित्तवर्ष में यह 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है।





