
जबलपुर (जय लोक)। सट्टा नेटवर्क के आरोपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लुकआउट नोटिस के वांछित आरोपी सतीश सनपाल को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। पैसे का रसूख बताकर अपने खिलाफ दर्ज मामलों में पुलिस जाँच का तरीका बदलवाने का प्रयास करने के संबंध में लगाई गई याचिका और उसके खिलाफ दर्ज अलग-अलग आपराधिक प्रकरणों को खारिज करने से न्यायालय ने इनकार कर दिया है।
एक मामूली लडक़ा चाय की दुकान पर काम करने वाला और ग्रॉसरी स्टोर में काम करके दुबई भागकर एक अनपढ़ आठवीं फेल वर्तमान में अपनी अथाह काली कमाई की दम पर खुद को देश के विशेषकर मध्य प्रदेश और जबलपुर के युवाओं के समक्ष एक आदर्श उदाहरण के रूप में पेश करने की असफल कोशिश कर रहा है। यह कोशिश वह इसलिए भी कर रहा है ताकि उसे दुबई के शेखों की खैरात की दोस्ती और व्यापार की साझेदारी मिल सके। यह कहानी सट्टे के बड़े कारोबार के आरोपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित सतीश सनपाल से जुड़े लोगों ने पूर्व में पुलिस गिरफ्त में खोल कर रख दी थी। अब सटोरिये आरोपी सतीश सनपाल को एक और बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश हिमांशु जोशी ने सतीश सनपाल से जुड़ी 6 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। साथ ही उसको वीसी के माध्यम से न्यायालय में उपस्थिति दर्ज करने की मांगी गई अनुमति भी नहीं दी गई है। जाँच एजेंसी की कार्यवाही में न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। आर्थिक अपराध के बड़े आरोपी युवकों को सट्टे में बर्बाद करने वाले गिरोह के आरोपी संचालक सतीश सनपाल के लिए यह बड़ा झटका है।
सतीश की ओर से दायर की गई याचिका में पुलिस द्वारा दर्ज किये गए मामले और आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने की गुहार लगाई गई थी और इस बात की छूट मांगी गई थी कि उसे दुबई से जबलपुर ना आना पड़े और उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में उपस्थिति दर्ज करने दी जाए।
याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश हिमांशु जोशी ने कहा कि पुलिस किस प्रकार जांच करेगी, किस तरीके से जाँच करेगी यह आरोपी की सुविधा नहीं बल्कि जाँच एजेंसी की जरूरत और विवेक पर निर्भर करेगा। इसके अलावा पुलिस द्वारा दर्ज किए गए विभिन्न आपराधिक मामलों को भी खारिज करने की 6 याचिका हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी। न्यायालय ने माना की चार्जशीट में प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार होने और इन पर चल रही जाँच में बयान आदि दर्ज होने बाकी है। न्यायालय ने माना कि इन मामलों में रिकॉड और जाँच सामग्री को देखते हुए मामलों से जुड़े तथ्यों और सबूत पर सुनवाई के दौरान जांच परख होनी चाहिए।

खाते फ्रीज़ हुए तो अटकी साँसें

आरोपी क्रिकेट सटोरिया दुबई में बैठकर जबलपुर ही नहीं पूरे महाकौशल के प्रमुख शहरों में अपना सटोरियों का और सफेद पोश लोगों का बड़ा नेटवर्क बन चुका है। अब खुद को बिलेनियर बताने वाले सटोरिये पर दुबई प्रशासन ने भी शिकंजा कसा है। इस बात की जानकारी पूरे देश और विदेशों में आग की तरह फैली।


उक्त आरोपी सटोरिया जैसे ही प्रशासन के शिकंजे में आता दिखा तो जबलपुर सहित महाकौशल के उसके साथी और कई रसूखदार लोगों की सांस ऊपर नीचे होने लगी। पुलिस ने भी अंदरुनी रूप से ऐसे लोगों को चिन्हित कर गोपनीय सूचना तैयार करना प्रारंभ कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार सट्टे के काले कारोबार में किसी के लाखों करोड़ों रुपए लगे हैं तो किसी के नाम का इस्तेमाल फर्जी फर्म बनाकर सट्टे की रकम को इधर से उधर करने के लिए किया गया है। किसी के शोरूम और व्यापार में उक्त काले धंधे की कमाई लगी है। हालांकि इस प्रकार की जानकारियाँ पहले भी पुलिस की जांच में सामने आई है लेकिन उस वक्त भी दबाव के कारण बहुत से रसूखदार और सफेद कॉलर वाले लोग बच गए थे।
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Author: Jai Lok





