किसानों में भारी नाराजगी अमरावती। गूगल के प्रस्तावित डेटा सेंटर के लिए आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीन आवंटन और जंगल की कटाई को लेकर स्थानीय नागरिकों तथा किसानों की नाराजगी सामने आई है। परियोजना के लिए करीब 160 एकड़ जंगल साफ किए जाने और तीन गांवों की कुल 586 एकड़ जमीन आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों के हितों पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों की चिंता है, विकास परियोजना के नाम पर जंगलों की कटाई से प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल असर पडेगा। वहीं, किसानों को आशंका है कि जमीन के अधिग्रहण या आवंटन से उनकी आजीविका और कृषि गतिविधियां प्रभावित होंगी। ग्रामीणों के बीच जमीन के उपयोग, मुआवजे और भविष्य में रोजगार के अवसरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। डेटा सेंटर जैसी डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद रहती है।
इसके साथ पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन और स्थानीय समुदायों की सहमति भी महत्वपूर्ण है। परियोजना को लेकर उठ रहे विरोध के बीच यह देखना अहम होगा, प्रशासन जंगल की कटाई, भूमि आवंटन और पर्यावरणीय मंजूरियों के संबंध में कितनी पारदर्शिता बरतता है। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। पेयजल और बिजली संकट को लेकर भी स्थानीय लोगों के मन में आशंकाये हैं।