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डाक विभाग में सीबीआई का छापा

फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे थे 8 कर्मचारी, खुलेंगे और भी राज

जबलपुर (जयलोक)। जबलपुर और कटनी में सीबीआई की टीम ने एक साथ बड़ी छापेमार कार्रवाई की है, जिसमें कुल 8 डाक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के तहत सीबीआई की टीम ने जबलपुर से 5 और कटनी से 3 डाककर्मियों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाही फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी प्राप्त करने के मामले में की गई है।  पकड़े गए 8 कर्मचारी डाक विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। जाँच में यह बात भी सामने आ रही है कि इस मामले में डाक विभाग के और भी कर्मचारियों को हिरासत में लिया जा सकता है।
कार्रवाही आज सुबह कटनी और जबलपुर में एक साथ की गई। डाक विभाग में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में कथित तौर पर फर्जी 10वीं की अंकसूची लगाकर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ  सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दल के पास उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जांच में फिलहाल आठ अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। वहीं जबकि 30 से अधिक संदिग्ध नियुक्तियां भी जांच के दायरे में है।

10वीं की अंकसूची के सत्यापन से खुला राज – दल के मुताबिक डाक विभाग में नियुक्त अभ्यर्थियों की 10वीं की अंकसूचियों का संबंधित शैक्षणिक बोर्डों से सत्यापन कराया गया था। जांच में कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अंकसूचियां संबंधित बोर्डों द्वारा जारी नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई थी। सीबीआई की जाँच में सामने आया है कि अलग-अलग अभ्यर्थियों ने विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक बोर्डों के नाम पर तैयार दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दस्तावेज बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर सहित अलग-अलग राज्यों के बोर्डों से संबंधित बताए गए हैं।

ये कर्मचारी हुए गिरफ्तार- इस मामले में शहर के विभिन्न डाकघरों में इनकी पोस्टिंग थी। इसमें मानवेंद्र सिंह, राजा बाबू अहिरवार, सौरभ शर्मा, प्रदीप कुमार और नयन कुमार सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार मानवेंद्र सिंह को कुंडम, राजा बाबू और सौरभ शर्मा को पाटन, प्रदीप कुमार को उमरिया-बरेला तथा नयन कुमार को शाहपुरा क्षेत्र के डाकघर में पदस्थ किया गया था। इसके अलावा बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान, रमाकांत शर्मा को भी विभाग में पदस्थ किया गया था। दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद डाक विभाग ने संबंधित आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। सीबीआई ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और भर्ती प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी की पूरी कड़ी की जांच शुरू कर दी है।
30 से अधिक जाँच के घेरे में- मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार इस मामले में यह भी कहा रहा है कि फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी प्राप्त करने वालों में सिर्फ ये 8 लोग ही शामिल नहीं हैं बल्कि डाक विभाग में ऐसे और भी कर्मचारी हो सकते हैं। इनमें फर्जी तरीके से नौकरी लगाने वालों के नाम भी सामने आ रहे हैं। जिसकी जाँच की जा रही है।

ये है मामला – डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवा की नौकरी सीधे 10वीं की अंकसूची के आधार पर मिल जाती है। यदि दसवीं की अंकसूची में नंबर बहुत अच्छे आए हैं तो आप ग्रामीण डाक सेवा में सीधी नौकरी पा सकते हैं। इसमें डाक विभाग आवेदनों को वरीयता के क्रम में रखता है और जिसके नंबर सबसे ज्यादा होते हैं, उसे नौकरी दे दी जाती है। इसमें कोई एंट्रेंस एग्जाम नहीं होता. इसी योजना का फायदा उठाकर कुछ अभ्यर्थियों ने 10वीं की फर्जी मार्कशीट बनवाई नौकरी हासिल कर ली।

डाक विभाग ने सीबीआई में की शिकायत- इस बारे में डाक विभाग को कुछ शिकायतें मिली और कुछ मार्कशीट में फर्जी नजर आईं, इसलिए डाक विभाग ने मामले की जानकारी सीबीआई को दी सीबीआई ने जांच शुरू की। डाक विभाग ने ऐसे 8 लोगों के खिलाफ  एफआईआर दर्ज की और उन्हें हिरासत में लिया। फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी पाने वाले 8 कर्मचारियों की पोस्टिंग जबलपुर और कटनी में की गई थी।
अब फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह की तलाश- ये फर्जीवाड़ा कई राज्यों से जुड़ा हुआ है, जांच में सामने आया है कि फर्जी अंकसूची अलग-अलग राज्यों के संस्थानों के नाम से तैयार की गई है। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन, मध्यप्रदेश राज्य ओपन, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम शामिल हैं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी अंकसूचियों को किसने तैयार किया और इन्हें अभ्यर्थियों तक कैसे पहुंचाया गया।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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