
एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं, डिग्री वाला डॉक्टर नहीं, लापरवाही के कारण गई थी जान
जबलपुर (जयलोक)। सेवा का भाव छोड़ चिकित्सा के क्षेत्र को पूर्ण रूप से व्यावसायिक और पैसे कमाने का जरिया मानकर इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने पूरे चिकित्सा व्यवसाय को बदनाम कर रखा है। सामान्य जन भावना यही बन गई है कि हर अस्पताल केवल लूट का अड्डा बन गया है। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है लेकिन शहर के नए-नए खुले अस्पतालों में जिस प्रकार से मरीजों की जान से खिलवाड़ और बिलों के नाम पर लूट के मामले सामने आ रहे हैं उनको देखते हुए लगने वाले इन आरोपों को पूरी तरीके से झूठलाया भी नहीं जा सकता।
गोरखपुर में रोड पर आदि शंकराचार्य जैसे पवित्र नाम पर संचालित एक अस्पताल में लापरवाही की परिकाष्टा हुई जिसके कारण एक 79 वर्षीय महिला विमल केसरवानी की ऑक्सीजन के अभाव में और तकनीकी चिकित्सा की गैर मौजूदगी के कारण नागपुर ले जाते समय एंबुलेंस में मौत हो गई।
मामले के जाँच हुई तो यह पाया गया कि आदि शंकराचार्य अस्पताल के प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है जिसके बाद सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी ने गोरखपुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है।
यह पूरा मामला विगत 20 जुलाई का है। मृतक वृद्ध महिला के पुत्र हिमांशु केसरवानी ने बताया कि वह गोरखपुर निवासी हैं और इस पूरे घटनाक्रम के बारे में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और सीएमएचओ से शिकायत की थी। शिकायत पर जाँच आगे बढ़ी तो यह पाया गया कि जिस डॉक्टर को जीवन रक्षक उपकरणों के साथ एंबुलेंस में भेजा गया था उसके पास वैध चिकित्सक की डिग्री नहीं थी बल्कि केवल कम्युनिटी हेल्थ की डिग्री थी जो ऐसे आपातकाल स्थितियों की लिए मान्य नहीं है। दूसरा जिस एंबुलेंस से आदि शंकराचार्य अस्पताल के प्रबंधन के द्वारा मरीज को नागपुर के लिए रेफर किया गया था उस एंबुलेंस में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं थी। जिसके कारण अस्पताल से निकलने के 5-10 किलोमीटर बाद ही मरीज को सांस लेने में बहुत दिक्कत होने लगी जब तक सिलेंडर बदलने की प्रक्रिया की जाती तब तक काफी देर हो चुकी थी।सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने जय लोक को बताया कि शिकायत को गंभीरता से लेकर जाँच पूरी कराई गई। जाँच में घोर लापरवाही सामने आई है जिसके बाद कार्यवाही के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है।
मौत के बाद भी सिवनी तक का सफर-शिकायतकर्ता की ओर से दी गई शिकायत में बहुत ही चौंकाने वाला गंभीर और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करने वाला आरोप भी लगाया गया है। सीएमएचओ ने भी इस बात की पुष्टि की कि शिकायतकर्ताओं के द्वारा इस बात का उल्लेख शिकायत में किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि जबलपुर से नागपुर के लिए रवाना होने के कुछ देर बाद ही ऑक्सीजन खत्म हो गया था सिलेंडर बदलने के दौरान हुई देरी में वृद्ध महिला की मृत्यु हो गई थी। लेकिन एंबुलेंस चालक और चिकित्सक रूप में मौजूद टेक्नीशियन ने इस बात को छुपाते हुए एंबुलेंस को सिवनी तक ले गए। महिला के पुत्र के द्वारा जब लगातार तेज विरोध किया गया तब जाकर महिला की जाँच की ओर वापस जबलपुर लाकर आदि शंकराचार्य अस्पताल में मृत महिला को छोडक़र फरार हो गए।






