
फिर 8 और 10 साल से तैनात पुलिस कर्मियों को भनक तक नहीं
जबलपुर (जयलोक)। हनुमानताल थाना अंतर्गत पिछले दिनों मूर्तिकार की आधी रात को हुई हत्या के पीछे दो गुटों के बीच चली आ रही पुरानी रंजिश ही नहीं बल्कि पुलिस के मुखबिर तंत्र की विफलता भी शामिल है। गोहलपुर पुलिस संभाग में एक थाने से दूसरे थाने और फिर इस संभाग के दूसरे थाने में 8-10 साल से पदस्थ होते चले आ रहे पुलिस कर्मचारियों की बड़ी विफलता भी माना जा रहा है। गोहलपुर सीएसपी के अधीन भी अन्य संभागों की तरह स्वयं की एक अलग टीम है जिसे टाइगर टीम कहा जाता है। इतनी बड़ी सनसनी खेज वारदात हो जाने के बाद उस टीम के सदस्य पुलिस कर्मियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतने सालों से एक ही जगह पर पदस्थ होने के बावजूद भी सिपाही, प्रधान आरक्षक, एएसआई अपना मुखबिर तंत्र क्यों नहीं सक्रिय कर पाए? यह सामान्य घटना नहीं थी।
मनोज उर्फ बब्बा सोनकर की हत्या के पहले कुछ सालों का इतिहास देखा जाए तो इस घटनाक्रम में दो हत्या और जुड़ी हुई हैं। 2017-18 में हुई कोमल सोनकर और बिट्टू मराठा की हत्या पूर्व में की गई थी। 2021 में दमोह नाका के समीप बिट्टू मराठा की मनोज के लडक़े मट्टू सोनकर और छोटू सोनकर ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। दोनों परिवारों के बीच में लंबे समय से तनातनी चली आ रही थी। इस बीच एक और घटनाक्रम घटित हो गया जिसके कारण दबी हुई रंजिश की चिंगारी आग में तब्दील हो गई।
एक प्रेम विवाह ने भी भडक़ाया माहौल
हत्या और आरोपियों के संबंध में जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने जय लोक को बताया कि इन दोनों परिवारों के बीच में लंबे अरसे से दुश्मनी चली आ रही है। पूर्व में भी उनकी आपसी दुश्मनी में हत्या जैसी वारदात घटित हुई है। रोहित मराठा के भाई बिट्टू मराठा की हत्या के आरोप में मनोज के दोनों लडक़े आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। कुछ समय पूर्व मराठा समाज की एक लडक़ी ने सोनकर समाज के एक लडक़े से प्रेम विवाह कर लिया था। यह मामला हनुमानताल थाने तक भी पहुंचा था। लेकिन लडक़े लड़कियां के बालिग होने के कारण इस मामले में पुलिस ज्यादा कोई कार्यवाही नहीं कर पाई थी और दोनों पक्षों के लोगों को समझाइश देकर मामला शांत करवाया था। लेकिन मामले के बाद से ही तनाव अंदर ही अंदर पनपता जा रहा था। विवादों के पुराने जख्म गहरा गए थे। पुलिस सूत्रों को भी इस बात की जानकारी है कि प्रेम विवाह के घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच में तनाव बढ़ता जा रहा था। लेकिन इस बात को पुलिस ने और पुलिस के सूचना संकलन करने वाले तंत्र ने बहुत हल्के में ले लिया।
गोहलपुर पुलिस संभाग अति संवेदनशील संभागों में शामिल है। यहां कई समुदाय के लोग बड़ी संख्या में एक साथ निवास करते हैं। पुराना इतिहास रहा है कि मराठा और सोनकर समुदाय के बीच आपस में पहले भी कई बार हिंसक टकराव हो चुके हैं। मराठा और सोनकर समाज के परिवार के बीच में लंबे समय से विवाद चल आ रहा था। 2021 में हुई हत्या के बाद बब्बा उर्फ मनोज सोनकर के दोनों लडक़ों को आजीवन कारावास की सजा हुई। इसके पूर्व में कोमल सोनकर की हत्या में आरोपी अंकित मराठा अपने एक साथी के साथ घटना के बाद से ही फरार चल रहा है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस मामले में आरोपी अंकित और उसके साथी को आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है लेकिन वह पुलिस की गिरफ्तार से दूर है।
एक और एंगल इस हत्याकांड से जुडक़र सामने आया है, पुलिस को इस बात की भी जानकारी लगी है कि बिट्टू मराठा का बहुत ही जिगरी रिश्ते का भाई रोहित मराठा, शुभम मराठा के इस घटना क्रम में शामिल होने की जानकारी सामने आ रही है। मृतक के पिरवार वालों ने आरोप लगाया है कि घटना को अंजाम देने के लिए रोहित मराठा अपने साथी चिंटू उर्फ भारत यादव के साथ बब्बा उर्फ मनोज सोनकर के पास पहुँचा। विवाद होने पर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
अब इस मामले से जुड़े कई बिंदु पुलिस के लिए कड़वे सवाल के रूप में खड़े हैं। लंबे समय से चली आ रही रंजिश, वारदातों के आरोपियों पर इनाम घोषित होने, न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद भी पुलिस की गिरफ्तारी से दूर कैसे हैं? पुलिस ने क्षेत्र में लगाए सीसीटीवी का सर्विलेंस कभी चेक नहीं किया जिसके कारण घटना के बाद पुलिस को आरोपियों की पहचान और उनके भागने से संबंधित जानकारियां एकत्रित करने में काफी परेशानियां हुई। सूत्रों ने बताया कि सिंधी कैंप और भान तलैया के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच में उपयोगी साबित नहीं हुए। एक कैमरा पीपल के पत्तों से छुप गया था तो दूसरा चालू नहीं था। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। आसपास की निजी दुकानों के सीसीटीवी कैमरों के भरोसे पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।
नहीं पकड़े गए हत्यारे
वहीं थाना प्रभारी शुभाषचंद्र बघेल ने बताया कि इस मामले में हत्यारों की तलाश जारी है। हत्यारों को पकडऩे के लिए टीम लगी हुई है। लेकिन पुलिस के लिए अभी चुनौती हत्यारों की शिनाख्त करने की है। जिन लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया है उन्हें गोली मारते हुए किसी ने नहीं देखा। इतना ही नहीं सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ खास नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने हत्यारों की शिनाख्त करना चुनौती है। हत्यारों का पता चलते ही उनकी गिरफ्तारी भी हो सकेगी।

Author: Jai Lok





