
दीपावली दिव्य प्रकाश की ओर उन्मुख होने का पावन आध्यात्मिक महापर्व है
दीपावली भारतीय सनातन संस्कृति का केवल बाह्य प्रकाशोत्सव नहीं, अपितु अविद्यारूपी अन्धकार से आत्मज्ञानरूपी दिव्य प्रकाश की ओर उन्मुख होने का पावन आध्यात्मिक महापर्व है। यह पर्व हमें बाह्य जगत् के प्रकाश के साथ अपने अन्त:करण में ज्ञान, विवेक एवं धर्माचरण की ज्योति प्रज्वलित करने की प्रेरणा प्रदान करता है । उपनिषदों का उद्घोष है-
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ।।
अर्थात् उस स्वयंप्रकाश परम चैतन्य के प्रकाश से ही सम्पूर्ण चराचर जगत् प्रकाशित होता है। सूर्य, चन्द्रमा एवं अग्नि का प्रकाश भी उसी परम ज्योति स्वरूप आत्मतत्त्व के प्रकाश से प्रकाशित है ।

भगवत्पाद आद्य जगद्गुरु भगवान् श्रीमदादिशङ्कराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत वेदान्त का परम उपदेश भी इसी आत्मस्वरूप के यथार्थ बोध में प्रतिष्ठित है। वास्तविक दीपावली तभी सार्थक है, जब अन्त:करण से अविद्या, अहंकार, राग-द्वेष एवं अधर्म का अन्धकार निवृत्त होकर ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, करुणा एवं सदाचार का दिव्य प्रकाश प्रस्फुटित हो।
मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम का जीवन धर्म एवं मर्यादा की प्रतिष्ठा का शाश्वत आदर्श है तथा भगवती महालक्ष्मी की आराधना हमें यह बोध कराती है कि वास्तविक समृद्धि धर्मनिष्ठा, पवित्रता, संयम एवं लोककल्याण की भावना से ही सुशोभित होती है ।

इस पावन दीपोत्सव पर भगवान् श्रीद्वारकाधीश, भगवती श्रीशारदाम्बा एवं भगवती महालक्ष्मी के श्रीचरणों में मंगलप्रार्थना है कि समस्त प्राणिमात्र का कल्याण हो, प्रत्येक परिवार में सुख, शान्ति एवं समृद्धि का वास हो तथा राष्ट्र और सम्पूर्ण विश्व में धर्म, सद्भाव एवं आध्यात्मिक चेतना का दिव्य प्रकाश निरन्तर प्रसारित होता रहे ।
समस्त सनातन धर्मावलम्बियों एवं श्रद्धालु भक्तजनों को दीपावली के पावन महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय आशीर्वाद ।
।। सर्वेषां मङ्गलं भूयात् । सर्वे भवन्तु सुखिन: ।।




