
26 हजार से अधिक जवान दिल्ली पुलिस के साथ संभालेंगे मोर्चा
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विभिन्न संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसमें शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों के राजधानी पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय बलों की कुल 221 कंपनियां तैनात करने की योजना है। इनमें पहले से दिल्ली में मौजूद 111 कंपनियों के अलावा गृह मंत्रालय से मंजूर की गई कम से कम 110 अतिरिक्त कंपनियां शामिल हैं। अतिरिक्त बल जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से बुलाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस तैनाती में 26 हजार से अधिक जवानों के दिल्ली पुलिस के साथ काम करने की तैयारी है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और सीआईएसएफ शामिल हैं। एक कंपनी में स्वीकृत संख्या सामान्यत: 120 से 130 जवानों की होती है, जबकि वास्तविक तैनाती में प्राय: 75 से 80 जवान शामिल रहते हैं।
सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कल धरना प्रदर्शन का एलान किया है। इसको लेकर दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि सीजेपी के प्रदर्शन को अनुमति नहीं है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी गई है, क्योंकि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। सीजेपी की चि_ी 7 अक्तूबर को मिली थी। इसके बावजूद अगर सीजेपी धरना प्रदर्शन करती है तो इसे बीएनएसएस की धारा-163 का उल्लंघन माना जाएगा, इसके तहत कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने इस प्रदर्शन के लिए एक आवेदन दिया था। इस सूचना पर विचार किया गया, जिसमें पाया गया कि यह बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी प्रदर्शन से 10 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होता है।
दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन हो सकते हैं बंद
दिल्ली पुलिस ने आज रात 9 बजे से कल तक 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारियों को भेजा गया है। डीएमआरसी की ओर से इस पर अंतिम पुष्टि का इंतजार है। पुलिस ने बताया कि इन स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, यात्रियों को इंटरचेंज सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन में बदल सकेंगे। लेकिन वे स्टेशन से बाहर नहीं निकल पाएंगे। साथ ही, इन स्टेशनों में प्रवेश भी नहीं कर पाएंगे। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उठाया गया है। सीजेपी ने 3 अक्तूबर को मुंबई में प्रदर्शन के बाद 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया था। पार्टी की ओर से कहा गया था कि अगर पुलिस उन्हें रास्ते में रोकती है तो वे उसी जगह बैठकर प्रदर्शन करेंगे।
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