
रक्षा मंत्री ने व्हीकल फैक्ट्री में रखी टी-72, टी-90 टैंक ओवरहाल परियोजना की नींव
वीएफजे में शिलायान्स, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी हुए शामिल
जबलपुर (जयलोक)। भारत का ‘अजय’ टैंक अपग्रेड का शुभारंभ आज हो गया है। भारतीय सेना के भरोसेमंद टी-72 और टी-90 टैंकों को नई ताकत अब व्हीकल फैक्ट्री में मिलेगी। यहां करीब 472 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत हथियार टी72, टी-90 टैंक की ओवरहॉलिंग वर्कशॉप बनने जा रहा है। इस वर्कशॉप का भूमि पूजन आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ किया। टी72 टैंक भारत ने रशिया से खरीदा था, अब इस टैंक को अपग्रेड करने के लिए भारत ने नए संयंत्र बनाए हैं। जिसमें दूसरा संयंत्र जबलपुर में बन रहा है। इस संयंत्र के बन जाने के बाद भारतीय सेना के यह सभी टैंक अपग्रेड करने में बड़ी मदद मिलेगी।
आत्मनिर्भता का यह प्रोजेक्ट मजबूत कड़ी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि व्हीकल फैक्ट्री में टी-72 और टी-90 का ओवरहॉलिंग किया जाएगा। आज का दिन हमारे लिए नई उचाईयां देने का है। आज जबलपुर को गौरवशाली स्थान देने का दिन है। मप्र सरकार ने उद्देश्य और निवेश और रक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किया है वह प्रशंसनीय है। नई नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का यह प्रयास मप्र को मेन्यूफेक्चरिंग बनाने की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया है यह कोई समान्य प्रोजेक्ट नहीं हैं। यह प्रोजेक्ट हमारे सैनिकों के लिए वरदान है जो दुश्मनों को नस्तेनाबूत कर देंगे।
युद्ध का तरीका बदला
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह जमाना युद्ध में नई टेक्नॉलजी का है। आज के समय में पुराने जमाने के तरीके से युद्ध नहीं जीता जा सकता। लोगों का सोचना है कि आज के जमाने में मिसाइल है तो टैंक की क्या जरुरत है। लेकिन मेरा विचार इससे अलग है। ड्रोन और मिसाइल सेटेलाइट से युद्ध हो रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंक की प्राथमिकता खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि वे सेना के जवानों और युद्ध के मैदान पर भी पहुँचे हैं जहां उन्होंने महसूस किया कि आज भी टैंक की आवश्यकता है। आज की आवश्यकता टैंक को समाप्त करने की नहीं बल्कि उसे आधुनिक बनाने की है। यह एक हथियार की लड़ाई नहीं हैं। टेंक का रोल समाप्त नहीं हुआ टेंक का रोल विकसित हो रहा है। टैक्नॉलाजी बदल रही है युद्ध का तरीका बदल रहा है। हमें ड्रोन भी चाहिए, मिसाइल चाहिए, एनर्जी हथियार भी चाहिए और हमें टेंक भी चाहिए।
आत्मनिर्भरत की ओर बढ़ रहा भारत
रक्षा मंत्री श्री ङ्क्षसह ने कहा कि जबलपुर की पहचान को नए लेवल पर ले जाया जा रहा है। जबलपुर का शुरू से ही नाता डिफेंस टेक्रॉलजी से रहा है आगे यह प्रमुख डिफेंस टेक्रॉलजी बनकर खड़ा होगा। 472 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट से देश के रक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के प्रयास में यह प्रोजेक्ट तेजी से कदम बढ़ाने जा रहा है। भारत का रक्षा क्षेत्र अब पूर्ण रूप से आत्मनिर्भता के लिए कदम बढ़ा चुका है और हम पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेंगे। बदलते भारत में जबलपुर की भूमिका कम महत्वपूर्ण नहीं हैं, यहां की फैक्ट्री, इंजीनियर, नौजवान इस परिवर्तन के भागीदार हैं। जबलपुर अपने आप में विशेष है।
हर साल 230 टैंकों को मरम्मत की जरुरत
रक्षा मंत्री ने कहा कि टेंक सीमाओं पर आयरन वॉल बनकर खड़े हैं। टैक आज भी हमारी सीमाओं पर दुश्मन के लिए काल बनकर खड़े हैं। मशीन की तरह टेंक को भी रिपेयर की जरूरत होती है। इनकी मरम्मत की भी जरूरत पड़ती है। हर साल 230 टैंक को मरम्मत की जरूरत है। लेकिन इस कमी को दूर करने के लिए जबलपुर को चुना गया। इसके तहत हर साल जबलपुर में 80 टेंक की मरम्मत की जाएगी। जब यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा तो दोनों फैक्ट्री से हर साल 230 टैंक की मरम्मत की जा सकेगी। जिससे आर्मी को समय पर टैंक मिल सकेंगे। आज दुनिया में युद्ध का चरित्र बदल रहा है पहले युद्ध मैदान में लड़े जाते थे अब वार टेक्नॉलाजी से लड़े जा रहे हैं। ऐसे समय में जिस देश के बाद एडवांस सप्लाई मजबूत हेागी वहीं देश युद्ध में टिक पाएगा।
सेना को नया बल देने जा रहा जबलपुर-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि जिसके नाम के साथ ही बल लगा है ऐसा जबलपुर सेना को नया बल देने जा रहा है। आज पीएम के नेतृत्व में देश के दुश्मनों को घर में घुसकर मारने का रिकार्ड रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में वंदे भारत से लेकर कई कोच बन रहे हैं और आज यहां एक बड़ा निर्णय हो रहा है। कल रक्षा बंधन हैं आज रक्षा का संकल्प बार्डर के लिए नए संकल्प के साथ हो रहा है। टी सीरीज के टेंकों का नवीनीकरण होगा। जबलपुर की फैक्ट्रीयों ने अपनी पहचान बनाई है। आने वाले समय की चुनौतियों के लिए नए संकल्प की शुरूआत हुई है। पौने पाँच सौ करोड़ की सौगात मिल रही है यह विकास प्रदेश के लिए गंगा है।
टी-72 टैंक की ओवरहॉलिंग के लिए बनेगी वर्कशॉप
जबलपुर में टी-72 टैंक की ओवरहॉलिंग के लिए वर्कशॉप बनाई जा रही है। जबलपुर व्हीकल फैक्ट्री के 30 से ज्यादा कर्मचारियों ने इसका तकनीकी प्रशिक्षण लिया है और बीते कुछ सालों में दो टी-72 टैंक की ओवरहॉलिंग भी की है। आने वाले 2 सालों में यह वर्कशॉप बनकर तैयार हो जाएगा। टी-72 टैंक को अपग्रेड किया जा रहा है। भारतीय सेना में इनकी तादाद हजारों में है। नए टैंक खरीदना एक महंगा सौदा है जबकि पुराने टैंक को मात्र एक से डेढ़ करोड़ की लागत में अपडेट किया जा सकता है। इससे भारतीय सेना की ताकत बढ़ेगी, जबलपुर इस मामले में अहम रोल अदा करेगा।
जबलपुर में किया जाएगा अपग्रेड
भारत में फिलहाल तमिलनाडु के अवाडी में टी-72 टैंक के ओवरहॉलिंग की सुविधा है। लेकिन भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय इस सुविधा को जबलपुर में भी विकसित करना चाह रहा है। इसके लिए बीते 4 सालों से प्रयास चल रहे हैं। पहले दौर में कर्मचारियों की ट्रेनिंग हुई अब इसके लिए एक बड़ी वर्कशॉप बनाई जा रही है।

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Author: Jai Lok






