
नई दिल्ली (जयलोक)। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े अमेंडमेंट बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने सरकार की मंशा और न्यायिक व्यवस्था में बढ़ती पेंडेंसी को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आज करीब 95 हजार मामले लंबित हैं। केवल जजों की संख्या बढ़ा देने से इतनी बड़ी पेंडेंसी कम नहीं होने वाली है। इसके लिए देश की न्यायिक व्यवस्था में एक रॅडिकल शिफ्ट की जरूरत है। तन्खा ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने को लेकर किसी भी राजनीतिक दल को कोई आपत्ति नहीं है। आवश्यकता पडऩे पर जजों की संख्या जरूर बढ़ाई जानी चाहिए, लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि इससे लंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार कितनी बढ़ेगी। अगर 95 हजार मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं तो केवल कुछ जज बढ़ा देने से समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा?

सुप्रीम कोर्ट बंद होने से चार दिन पहले बिल क्यों?
तन्खा ने अमेंडमेंट बिल लाने की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब इस बिल को लेकर किसी राजनीतिक दल को कोई आपत्ति नहीं है तो इसे इतनी जल्दबाजी में लाने की आवश्यकता क्या थी? सुप्रीम कोर्ट के बंद होने से महज चार दिन पहले इसे लाने के बजाय सरकार जुलाई में संसद के सत्र के दौरान इसे नियमित विधायी प्रक्रिया के तहत ला सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट के सम्मान का सिर्फ दिखावा करती है सरकार
अपने संबोधन के दौरान तन्खा ने सरकार के सुप्रीम कोर्ट के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार इस बिल के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करती है और उसे महत्व देती हैं, लेकिन दूसरी तरफ जब सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और निर्देशों के पालन की बात आती है तो सरकार का रवैया अलग दिखाई देता है। कांग्रेस सांसद के तौर पर अपनी बात रखते हुए तन्खा ने जम्मू-कश्मीर और अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे और वहां चुनाव कराने के विषय पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सरकार को जल्द कदम उठाने के लिए कहा था। लेकिन उस समय सरकार की सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उदासीनता और देरी यह बताती है कि सरकार का सुप्रीम कोर्ट के सम्मान को लेकर वास्तविक रवैया क्या है।


जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाते ही सदन में हंगामा
जम्मू-कश्मीर और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुद्दा उठाते ही सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। सत्ता पक्ष की ओर से तन्खा के बयान पर आपत्ति जताई गई। शोर-शराबे और विरोध के बीच उनके संबोधन में लगातार व्यवधान पड़ा और वे अपनी बात पूरी नहीं कर सके।
Author: Jai Lok






