
जबलपुर (जय लोक)। धार्मिक जोश और भावनाओं में आकर बहुत सारे लोग बहुत सारी गतिविधियों को प्रारंभ करते हैं लेकिन उसकी निरंतरता को बनाए रखना ही उस कार्य के प्रति और ईश्वर के प्रति गहन आस्था को परिलक्षित करता है। विगत 37 सालों से जबलपुर के चर्चित नेताओं में शुमार पूर्व नेता प्रतिपक्ष वरिष्ठ पार्षद कमलेश अग्रवाल जबलपुर से झारखंड में स्थित देवघर बाबा बैजनाथ धाम में कांवड़ लेकर जा रहे हैं। यह सफर 37 साल पहले कमलेश अग्रवाल ने पाँच लोगों के साथ शुरू किया था और आज वर्तमान स्थिति में एक सैंकड़ा से अधिक लोगों का जत्था बम-बम के जयघोष के साथ कांवड़ लेकर बाबा बैजनाथ धाम को जल अर्पित करने जाता है।
परसों महानगरी से रवाना हो रहा जत्था – कमलेश अग्रवाल के नेतृत्व में इस वर्ष बाबा बैजनाथ धाम के लिए परसों 8 अगस्त को तकरीबन एक सैंकड़ा लोगों का यह जत्था महानगरी एक्सपे्रस से दिन में तीन बजे प्लेटफार्म क्रमांक एक से रवाना होगा। देवघर के लिए भोले के दिवाने इन भक्तों को रवाना करने और शुभकामनाएं देने के लिए बड़ी संख्या में उनके समर्थक शहर के पूज्य साधु संतों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका उत्साहवर्धन करने पहुंचते हैं।

125 किमी की यात्रा – प्रतिवर्ष भाजपा नेता कमलेश अग्रवाल अपने सौ से अधिका साथियों के साथ जबलपुर से रवाना होकर पहले काशी विश्वनाथ के दर्शन करते हैं फिर वहां से सुल्तानगंज से माँ गंगा का जल कांवड़ में भरकर यहां से 125 कि.मी. की पैदल यात्रा प्रारंभ करते हैं अगले चार दिनों में यह यात्रा विभिन्न पड़ाव से होते हुए देवघर पहँुचती है। जहां पूरी आस्था, श्रृद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ बाबा बैजनाथ धाम को गंगा जल अर्पित किया जाता है।

जबलपुर और नगरवासियों के लिए करते हैं कामना
भाजपा के वरिष्ठ नेता कमलेश अग्रवाल कहते हैं कि बाबा बैजनाथ धाम की कृपा है कि विगत 37 सालों से वे निरंतर उनके श्रीचरणों में अपने साथियों के साथ उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित कर पा रहे हैं। श्री अग्रवाल कहते हैं वे अपने और अपने परिवार के लिए ही नहीं बल्कि संम्पूर्ण जबलपुर के नागरिकों की ओर से मत्था टेककर सबकी प्रगति की कामना और जबलपुर के विकास की कामना करते हैं। सावन में अनुमानित तौर पर एक दिन में तकरीबन पाँच लाख लोग बाबा बैजनाथ धाम में दर्शन और जलअर्पण करने पहुँचते हैं।


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सन 1988 में की थी गौरीघाट से गुप्तेश्वर कांवड़ यात्रा की पहली शुरूआत
वरिष्ठ भाजपा नेता कमलेश अग्रवाल ने अपने अनुभव और यादों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1988 में उन्होंने पहली बार जबलपुर में कांवड़ा यात्रा की शुरूआत की थी। इस दौरान वे और उनके तकरीबन सौ युवा साथी गौरीघाट से माँ नर्मदा का जल कांवड़ में भरकर यात्रा के रूप में पैदल गुप्तेश्वर मंदिर पहुँचे थे। यह पहला अवसर था जब जबलपुर में कांवड़ यात्रा निकाली गई थी।
Author: Jai Lok





