
जबलपुर/कटनी (जयलोक)। एक जमीन घोटाले में निलंबित कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया को अब कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली है। फरार चल रहीं पच्चीसिया के मामले में बहुचर्चित जमीन सौदा और कथित पद के दुरुपयोग के मामले ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ ले लिया। निलंबित तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसियाको जिला एवं सत्र न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लीला लोधी की अदालत ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया। अब आखिरी उम्मीद हाईकोर्ट को लेकर ही रहेगी।
दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई के दौरान मामले में कथित जमीन सौदे, बैंक लेनदेन, दस्तावेजी साक्ष्यों, बयानों और पुलिस अधिकारी के पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े बिंदुओं पर बहस हुई। अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद अब निलंबित अधिकारी के लिए गिरफ्तारी से बचाव का अगला प्रमुख कानूनी विकल्प मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करना है। हालांकि, हाईकोर्ट से अंतरिम संरक्षण मिलने तक केवल याचिका दायर किए जाने से गिरफ्तारी पर स्वत: रोक नहीं लगती। इस बीच पुलिस ने तीनों फरार आरोपियों—नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार का इनाम घोषित किया है।

खाकी वर्दी को हाई प्रोफाईल मामला

जिस अधिकारी पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, उसी के खिलाफ अब गंभीर आपराधिक आरोपों की जांच चल रही है। कटनी के कुठला थाने में दर्ज एफआईआर ने पूरे प्रकरण को हाईप्रोफाइल बना दिया है। पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।


क्या है जमीन सौदा प्रकरण
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, एक हत्या के मामले में आरोपी पक्ष को कथित तौर पर कानूनी राहत दिलाने का भरोसा देकर उसकी जमीन का सौदा कराया गया। आरोप है कि लगभग 2.15 हेक्टेयर जमीन, जिसका कथित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ और सरकारी मूल्य लगभग 82.86 लाख बताया गया है, महज 18.20 लाख में बिकवाने का दबाव बनाया गया। जांच एजेंसी इस कथित जमीन सौदे को हत्या के मामले में पुलिस कारज़्वाई और आरोपी पक्ष को मिलने वाली संभावित राहत से जोडक़र देख रही है। आरोपों की पुष्टि के लिए जमीन की रजिस्ट्री, भुगतान के ोित, बैंक खातों और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क की जांच की जा रही है।
यह आरोप भी सामने आया है कि जमीन सौदे में सीधे आरोपियों के बजाय कथित रूप से करीबी लोगों और बिचौलियों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
हत्या के प्रकरण से जुड़ा है मामला
पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू कुठला थाने में दर्ज हत्या के प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच में यह आरोप सामने आया कि हत्या के आरोपी के विरुद्ध निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं हो पाया और इसके परिणामस्वरूप उसे डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया। जांच एजेंसी इस घटनाक्रम और कथित जमीन सौदे के बीच किसी आपराधिक साजिश अथवा आर्थिक लेनदेन का संबंध तलाश रही है। इसी कड़ी में जेल में बंद हत्या के आरोपियों के बयान भी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी कथित जमीन सौदे, पुलिस कार्रवाई और डिफॉल्ट बेल के घटनाक्रम का आपस में मिलान कर रही है। महत्वपूर्ण यह है कि केवल डिफॉल्ट जमानत मिल जाना अपने आप में किसी अधिकारी की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं करता। जांच में यह स्थापित करना होगा कि क्या निर्धारित समय में आरोपपत्र दाखिल न होने के पीछे कोई जानबूझकर किया गया हस्तक्षेप था और यदि था तो उसका कथित जमीन सौदे से क्या संबंध था।
अब हाईकोर्ट पर टिकी निगाहें
जिला अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों के लिए अगला महत्वपूर्ण कानूनी मंच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट है। बचाव पक्ष वहां अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की मांग कर सकता है। हाईकोर्ट मामले की केस डायरी, जांच की स्थिति, आरोपों की प्रकृति, आरोपी की भूमिका और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय करेगा। इस बीच पुलिस की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। यदि हाईकोर्ट से अंतरिम संरक्षण नहीं मिलता और आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं, तो गिरफ्तारी के प्रयास और तेज हो सकते हैं।
Author: Jai Lok






