
सैन्य हथियार, रसद सामग्री अग्रिम मोर्चों तक कम समय में पहुँचाई जा सकेगी
नई दिल्ली (जयलोक)। अरुणाचल प्रदेश के सबसे संवेदनशील और दुर्गम बॉर्डर पर भारतीय सेना की पहुंच को अभेद्य बनाने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने महाप्लान तैयार कर लिया है। कुरुंग कुमे जिले के हुरी से लेकर अपर सुबनसिरी के ताकसिंग तक करीब 95.348 किलोमीटर लंबी ऑल-वेदर ग्रीनफील्ड सडक़ का निर्माण होने जा रहा है। बीआरओ ने अपने महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के तहत इस हाई-प्रायोरिटी रोड के लिए फीजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह नया ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट एनएचडीएल (एनएचडीएल) मानकों पर तैयार किया जाएगा, जिससे भारी सैन्य वाहन, तोपें और रसद सामग्री सीधे वास्तविक नियंत्रण रेखा के अग्रिम मोर्चों तक बेहद कम समय में पहुंचाई जा सकेगी। रणनीतिक जानकारों के मुताबिक यह प्रोजेक्ट चीन सीमा पर भारत की डिफेंसिव पोजीशन को आक्रामक ताकत में बदल देगा। चीन की चालबाजी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बीआरओ का यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर गेमचेंजर साबित होने वाला है।
यह सडक़ सिर्फ इसलिए अहम नहीं है कि यह अरुणाचल प्रदेश के दो दूर-दराज इलाकों को जोड़ेगी। इसकी अहमियत इस बात से है कि टक्सिंग कहां स्थित है और भारत सीमा की ओर सडक़ों का जो बड़ा नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है, उसमें इसकी क्या भूमिका है। नाचो और ताकसिंग के बीच अभी जो सडक़ है, वह संकरी और खराब हालत में है। लोगों का कहना है कि कुछ जगहों पर तो दो गाडिय़ां एक-दूसरे के बगल से गुजर भी नहीं सकतीं। इससे सेना की आवाजाही में भी दिक्कत होती है। इसीलिए, प्रस्तावित हुरी-टक्सिंग एलाइनमेंट (रास्ता) बहुत अहम है। एक ‘नए एलाइनमेंट’ और ग्रीनफील्ड सडक़ के तौर पर यह हुरी की तरफ से ताकसिंग तक पहुंचने का एक और रास्ता देगा, जिससे सीमावर्ती इलाके में एक और सडक़ मार्ग बन जाएगा। ताकसिंग, अपर सुबनसिरी में चीन के तिब्बत इलाके से सटा हुआ एक अग्रिम इलाका है। यह बस्ती और इसके आस-पास के इलाके एलएसी के करीब है। सडक़ से यह तय होता है कि सैनिक कितनी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, कितना साजो-सामान ले जाया जा सकता है, कितनी बार जरूरी चीजें पहुंचाई जा सकती हैं और कितनी तेजी से इंजीनियरिंग और मेडिकल मदद अग्रिम ठिकानों तक पहुंच सकती है।
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Author: Jai Lok






