
प्रक्षेपण को आम लोग भी देख सकेंगे
ऑनलाइन कराना होगा पंजीकरण
नई दिल्ली (जयलोक)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 4 सितंबर 2026 को जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है। इस मिशन का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रात 2:55 बजे तय किया गया है। इस मिशन को धरती के विस्तृत अवलोकन और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मीडया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पर मिशन की जानकारी साझा की। ईओएस-05 से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा। जियो-इमेजिंग उपग्रह पृथ्वी की सतह की विस्तृत तस्वीरें और जरूरी आंकड़े उपलब्ध कराते हैं। इससे फसलों की स्थिति पर नजर रखने, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने और बदलती भौगोलिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है। उपग्रह से मिलने वाला डेटा सरकारी एजेंसियों को कई अहम फैसले लेने में मदद कर सकता है। विशेष रूप से बाढ़, भूस्खलन, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी राहत एवं बचाव अभियानों के लिए उपयोगी साबित होती है।
इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में भी ऐसे उपग्रहों की भूमिका अहम होती है। इस प्रक्षेपण को आम लोग भी देख सकेंगे। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद लॉन्च व्यू गैलरी से रॉकेट के प्रक्षेपण को देखने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए इच्छुक लोगों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। रात के अंधेरे में रॉकेट के आसमान की ओर तेजी से बढऩे का दृश्य दर्शकों के लिए खास अनुभव होगा। इसरो पिछले कई वर्षों से संचार, मौसम, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े उपग्रहों के जरिए देश की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन भी इसी प्रयास का हिस्सा है। इस मिशन की सफलता से पृथ्वी अवलोकन क्षमता को मजबूती मिलने के साथ कृषि, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
Author: Jai Lok






