Download Our App

Home » Uncategorized » अब जानलेवा हो गया है डीजे का शोर

अब जानलेवा हो गया है डीजे का शोर

डीजे को लेकर अब आंदोलन की हो रही तैयारियाँ

जबलपुर (जयलोक)। त्योहारों तथा अन्य आयोजनों के अवसर पर डीजे बजाने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। डीजे का शोर अब जानलेवा भी साबित हो रहा है। देशभर में डीजे की धमक से मौतें भी हो रही हैं वहीं लोग घायल भी हो रहे हैं। डीजे के घातक शोर पर बंदिश लगाने के लिए आंदोलन भी शुरू हो रहे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने तो शहर में नो डीजे अभियान शुरू करने का फैसला किया है। वहीं डीजे पर प्रतिबंध लगाने के लिए कल 28 सितम्बर को कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा जा रहा है।
प्रदेश में डीजे की गूंज से मौत भी होने लगी हैं। बैतूल के जएच कॉलेज परिसर में गणेश दर्शन के दौरान डीजे की आवाज से बीएससी प्रथम वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा की तबियत बिगड़ गई, कॉलेज के परिसर में तेजी से बज रहे डीजे से प्रतिक्षा को चक्कर आया और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। गणेश उत्सव के दौरान विसर्जन यात्रा में पुणे में डीजे के कारण 597 लोग बीमार हो गए। वहीं इन बीमार लोगों में 42 लोगों की हालत इस तरह बिगड़ी की उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
अब दशहरा पर्व आ रहा है और इसकी तैयारियाँ भी शुरू हो चुकी हैं। दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना के लिए जगह जगह पंडाल बनाए जाएंगे और इन पंडालों के बाहर डीजे भी बजाए जाएंगे। दशहरा के विसर्जन जुलूस में भी दुर्गा उत्सव समितियों द्वारा जमकर डीजे बजाए जाते हैं। इसलिए डीजे के बजने से होने वाली घातक घटनाओं से बचाव के लिए पहले ही प्रतिबंधात्मक कार्रवाही की जाने की अपेक्षा की जा रही है।
एक ट्रक में सिर्फ डीजे ही लगाया जाता है
जुलूस के दौरान डीजे बजाने का चलन इस कदर बढ़ा है कि एक पूरे ट्रक में सिर्फ डीजे बजाने का इंतजाम किया जाता है और बड़ी संख्या में डीजे बजाने के लिए बड़े बड़े साउंड बॉक्स भी लगाए जाते हैं। ये डीजे इस खौफनाक तरीके से बजते हैं कि इसकी धमक से लोग हिल जाते हैं।
भारी खर्चिला है डीजे बजाना
डीजे बजाने का जो चलन बढ़ा है वह कम खर्चिला नहीं हैं डीजे बजाने वाले बड़ी रकम वसूलते हैं।
विशेषज्ञों की राय
डीजे बजाने के दौरान होने वाली तेज आवाज के संबंध में विशेषज्ञों की राय भी सामने आई है। 80-90 डेसीबल से ऊपर डीजे बजने से शरीर में एडेनलाइन हार्मोन का स्तर अचानक बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्टबीट तेजी से बढ़ती है। जो साइलेंट कार्डियक अरेस्ट की संभावना बनाती है। अंदरुनी बीमारी वाले मरीजों के लिए डीजे की आवाज घातक होती है और ऐसे बीमारों के साथ किसी भी तरह का हादसा हो सकता है।
डीजे के नियमों का नहीं हो रहा पालन
डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन और पुलिस के सख्त नियम हैं, जिनका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई और डीजे जब्ती की जा सकती है। सार्वजनिक या निजी कार्यक्रमों में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने के लिए स्थानीय प्रशासन (प्रशासन/पुलिस) से पहले अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति डीजे बजाने पर सख्त कार्रवाई की जाती है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक डीजे और तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। रात 10 बजे के बाद अनुमति नहीं दी जाती है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ध्वनि का स्तर तय सीमा में होना चाहिए। दिन में अधिकतम 55 डेसिबल  और रात में 45 डेसिबल अन्य क्षेत्रों जैसे व्यावसायिक या औद्योगिक इलाकों के लिए मानक अलग और थोड़े अधिक होते हैं, लेकिन तय डेसिबल से ज्यादा आवाज पर रोक है। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जहंा तहां मनमर्जी से डीजे का शोर सुनाई दे रहा है।
नियम तोडऩे पर कार्रवाई
निर्धारित समय के बाद या बिना अनुमति डीजे बजाने पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की जाती है। नियमों का उल्लंघन करने पर डीजे उपकरण और वाहन जब्त किए जा सकते हैं तथा मोटर वाहन अधिनियम व कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। तेज आवाज या अवैध रूप से डीजे बजने पर आम नागरिक आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं।
धमक से हिल जाते हैं घर
डीजे की धमक से ना सिर्फ लोगोंं को खतरा है बल्कि आसपास के घरों में भी कंपनी हो रही है। कई जगहों पर तो देखा गया है कि डीजे के शोर से खिडक़ी दरवाजों में कंपन होती है। इतना ही नहीं घरों की दीवारें भी डीजे की धमक से कमजोर हो रही हैं।

हमारा शरीर लघु ब्रह्मांड, इसे स्वस्थ रखना हमारी जिम्मेदारी : डॉ. मोहन यादव

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » Uncategorized » अब जानलेवा हो गया है डीजे का शोर
error: Content is protected !!