
जबलपुर (जय लोक)। मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा लागू की गई स्वामित्व योजना के तहत निजी संपत्तियों के अभिलेख और स्वामित्व के दस्तावेज तैयार करने के लिए पटवारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। लेकिन इस कार्य का पटवारियों द्वारा इसलिए विरोध किया जा रहा था क्योंकि उन्हें यह संदेह था कि इस प्रकार के प्रकरणों में जब भविष्य में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न होंगे तो दूसरे पक्ष के रूप में उन्हें पार्टी बनाया जाएगा और उन्हें कानूनी पचड़ों में अन्य लोगों के द्वारा उलझाया जा सकता है। इस बात को लेकर लगातार बने विरोधाभासी माहौल के बीच में स्वामित्व योजना का कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। पटवारी संघ की ओर से कर्मचारियों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की जा रही थी। लेकिन अब प्रदेश के 22000 पटवारियों को 68 लाख संपत्तियों के स्वामित्व के दस्तावेज तैयार करने का मार्ग साफ हो गया है।
दरअसल प्रांतीय पटवारी संघ की ओर से उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। इस याचिका को क्रांति पटवारी संघ ने वापस ले लिया है। न्यायमूर्ति श्री मनिंदर सिंह भट्टी की एकल पीठ ने अनुमति देते हुए उसे निरस्त कर दिया।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह एवं शासकीय अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ला ने शासन की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से पटवारियों को दी है। पटवारी संघ को अपने सदस्यों की ओर से आदेश को चुनौती देने का अधिकार ही नहीं है। अतिरिक्त महाधिवक्ता की ओर से दायर की गई है इस आपत्ति के बाद पटवारी संघ ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति न्यायालय से माँगी। जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
विगत 13 अगस्त को केंद्र की स्वामित्व योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने इससे संबंधित आदेश जारी किया था। राजस्व अमले से पटवारियों को कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही पटवारियों को निजी संपत्तियों के अभिलेख एवं स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रदेश में करीब 68 लाख संपत्तियों के स्वामित्व के दस्तावेज तैयार होने हैं। अब इस याचिका के वापस हो जाने के बाद स्वामित्व योजना के कार्य को आगे गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।
1000 से ज्यादा पटवारी पदोन्नति होकर बने आर.आई.
स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण की निशुल्क रजिस्ट्री में आनाकानी कर रहे पटवारियों के लिए अच्छी खबर यह है कि उन्हें राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति किया गया है। पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष ने बताया कि परसों पदोन्नत हुए पटवारियों की सूची शासन की ओर से जारी हो गई है। इस निर्णय को पटवाररियों की नाराजगी दूर करने और मध्य का एक रास्ता निकालने का प्रयास माना जा रहा है।
इसके पूर्व में आयुक्त भू-अभिलेख ने 1050 पटवारी की सूची तैयार कर कलेक्टरों से सेवा संबंधी जानकारी मांगी थी। 50 वर्ष कम उम्र के पटवारियों को पदोन्नत किये जाने की बात कही गई थी।
इस पदोन्नति के लिए मध्य प्रदेश भू अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित (कार्यपालिका एवं तकनीकी) सेवा भर्ती नियम 2012 में 18 जून 2018 को किए गए संशोधन के आधार पर दिए गए प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। इन्हीं प्रावधानों के अंतर्गत ही 1 जनवरी 2026 को 50 साल से कम आयु वाले पटवारियों को पदोन्नत किया गया है।
विरोध जारी है ग्वालियर की याचिका पर सुनवाई बाकी
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष जागेंद्र पीपरे ने बताया कि हमारा विरोध स्वामित्व योजना को लेकर नहीं है बल्कि शासन द्वारा पटवारियों को विके्रता बनाए जाने को लेकर है इसमें कई प्रकार की कानूनी परेशानियाँ उत्पन्न होंगी। यह अधिकार राजस्व अधिकारी या शासन को ही प्राप्त होना चाहिए वे ही विके्रता के रूप में दूसरे पक्षकार बने। ग्वालियर में पटवारी संघ की ओर से भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई 29 सितम्बर को होना है हमारा विरोध अभी जारी है। शासन को हमारी इस मांग पर विचार करना चाहिए।

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Author: Jai Lok






