
पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पुलिस की जाँच पर रोक
स्वतंत्र आपराधिक मामलों में जाँच रहेगी जारी
जबलपुर (जय लोक)। प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण के कथित मामले में जबलपुर के दो सोनोग्राफी सेंटरों से जुड़े प्रकरण पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने डॉ. राजेंद्र कुमार अग्रवाल और डॉ. सतीश अग्रवाल की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 23(1) के तहत पुलिस द्वारा की जा रही जांच को कानून के अनुरूप नहीं माना और इस मामले में पुलिस जांच एवं अभियोजन की कार्यवाही निरस्त कर दी।
मामला 27 जुलाई 2026 को मालवीय चौक स्थित आरके डिजिटल एक्स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर और अधारताल स्थित सरल सोनोग्राफी सेंटर में स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस की संयुक्त जांच से शुरू हुआ था। मामले में पुलिस ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत भी अपराध दर्ज किए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 28 के तहत इस कानून के अपराध में न्यायालय संज्ञान केवल निर्धारित प्राधिकारी की शिकायत पर ही ले सकता है।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के डॉ. बृजपाल सिंह मामले में दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत जांच की जिम्मेदारी उचित अधिकारी की है। पुलिस इस कानून के तहत मुख्य जांच एजेंसी की भूमिका नहीं निभा सकती। हालांकि, यदि उसी घटना से स्वतंत्र रूप से बीएन्स के अपराध बनते हैं तो उनकी जांच पुलिस कर सकती है।

Author: Jai Lok





