
चंचलाबाई कालेज की प्राचार्य डॉ. वंदना दुबे ने किया सतर्क
जबलपुर (जय लोक)। डीजे के घातक जानलेवा शोर को लेकर चंचलाबाई कालेज की प्राचार्य डॉ वंदना दुबे का कहना है कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध जर्मन माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कोच ने 1910 में ही ध्वनि प्रदूषण के संबंध में भविष्यवाणी कर दी थी, उन्होंने कहा था कि ‘एक दिन ऐसा आएगा जब मनुष्य को स्वास्थ्य के सबसे बड़े शत्रु के रूप में निर्दयी शोर से इस प्रकार लडऩा होगा जैसे महामारियों से लड़ा जाता है’ रॉबर्ट कोच के इस कथन का तात्पर्य भविष्य में अत्यधिक अनियंत्रित शोर (ध्वनि प्रदूषण) का मानव के संपूर्ण स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों से था जो आज सच हो रहा है। गत कुछ दिनों में गणेशोत्स्व के चलते तेज डीजे से कुछ लोगों की मृत्यु की खबर भी सामने आई है। नगरवासी जानते हैं कि विभिन्न धार्मिक आयोजन में न केवल भव्य प्रकाश व्यवस्था की जाती है वरन अत्यधिक तेज आवाज के साउंड सिस्टम का भी प्रयोग किया जाता है। नगर-प्रशासन के साथ-साथ प्रबुद्ध वर्ग एवं आयोजन समिति के सदस्यों को भी विचार करना होगा।
ध्वनि प्रदूषण के कारण सुनने की क्षमता में कमी (टिनिटस)अनिद्रा, तनाव, हृदय रोग आदि के साथ अन्य कई शारीरिक एवं मानसिक रोग देखे जा रहे हैं। वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू. एच.ओ.)ध्वनि प्रदूषण को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। यूरोपियन सोसायटी आफ कार्डियोलॉजी, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने 4 से 6 मिलियन हृदय संबंधी रोगों का कारण पर्यावरण विशेष कर ध्वनि और वायु प्रदूषण को बताया है। यूरोप अकेले में 66000 मौतें प्रतिवर्ष ध्वनि प्रदूषण से हो रही है। यह अकाट्य सत्य है कि ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य जोखिमों का को बढ़ाता है, आंकड़े बताते हैं भारत में हर वर्ष 12000 से अधिक मौतें इसी कारण हो रही हैं और 48000 नए हृदय रोगी प्रतिवर्ष सामने आ रहे हैं। 6.3 करोड़ (63 मिलियन) भारतीय श्रवण बाधित सुनने की गंभीर समस्या से पीडि़ है।ध्वनि प्रदूषण की बात करने से पहले समान्य ध्वनि स्तर उसका मापन और हानिकारक ध्वनि स्तर की जानकारी सभी के लिए आवश्यक है जिससे गंभीरतापूर्वक इस गंभीर समस्या को समझ कर नियंत्रण एवं निवारण की दिशा में प्रयास किया जा सके। वस्तुत: सभी प्रकार की ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण नहीं है डब्लू.एच.ओ. के अनुसार 65 डिसीबल से अधिक स्तर वाली ध्वनि,ध्वनि प्रदूषण के अंतर्गत आती है।
75 डेसिबल हानिकारक और 120 डेसिबल खतरनाक
ध्वनि विशेषज्ञ, ध्वनि का स्तर दिन में 65 डिबी एवं रात्रि में 30 डिबी से कम रखने का सुझाव देते हैं। यह सत्य है कि सभी ध्वनि शोर नहीं होती लेकिन सभी शोर ध्वनि है। ध्वनि एक सामान्य.. प्रीतिकर सुखद सुकून देने वाला श्रव्य अनुभव है जबकि शोर अनचाही, अवांछित तीव्र कर्कश परेशान करने वाली आवाज है जो कि कानों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ अन्य कई शारीरिक मानसिक तकलीफें देती हैं। विशेष बात यह है कि ध्वनि और शोर दोनों वायुमंडलीय कंपन है जब यह कंपन कानों में सुकून देता है तो ध्वनि माना जाता है और जब अशांति असुविधा बढ़ा देता है तो शोर की श्रेणी में आ जाता है।
ध्वनि प्रदूषण के अनेक कारण हैं कुछ ऐसे जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल और असम्भव सा है और कुछ ऐसे जिसका पूर्ण नियंत्रण हमारे स्वयं के पास है। ध्वनि प्रदूषणों के मुख्य कारण यातायात, वाहनों से उत्पन्न ध्वनि, औद्योगिक निर्माण कार्य से उत्पन्न ध्वनि, संयंत्रों से उत्पन्न ध्वनि, प्राकृतिक एवं जैविक ध्वनि और इन सब के अतिरिक्त सार्वजनिक सामाजिक पारिवारिक और धार्मिक आयोजनों में लगाए जाने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्र हैं। वर्तमान समय में विभिन्न पारिवारिक सामाजिक और धार्मिक आयोजनों, जलसों-जुलूसों में कार्यक्रम को भव्य और प्रभावशाली प्रदर्शित करने हेतु तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग प्रचलन में बढ़ा है जो कि दुखद है कई बार तो यह आवाज़ इतनी तेज होती है कि इस ध्वनि कंपन से विचलन अनुभव होने लगता है। यह अनावश्यक अनुचित अस्वस्थकर शोर जनमानस को मंद विष की तरह विभिन्न बीमारियों के मुखद्वार की तरफ ले जा रहा है। ध्वनि प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों में जो चौंकाने वाले आंकड़े आ रहे हैं वह भयावह है अत: समय रहते सचेत होना आवश्यक है। यद्दपि सरकार के द्वारा ध्वनि प्रदूषण विनियम और नियंत्रण के तहत विभिन्न नियम एवं सख्त कानून बनाए गए हैं जिसके अंतर्गत एक नियम यह भी है कि विभिन्न क्षेत्रों में निर्धारित मानक स्तर पर ही ध्वनि होनी चाहिए और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का भी प्रयोग निर्धारित समय पर हो। ज्ञात हो कि रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक इन पर पूर्ण प्रतिबंध है, जानकारी, जागरूकता की कमी के कारण और गैर जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवस्था के कारण यह नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। जनमानस और प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि जन स्वास्थ्य को ध्यान रखते हुए ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों को जन-जन तक पहुंचाएं और प्रदूषणकर्ता पर सख्त कार्यवाही कर देश को खुशहाल और स्वस्थ बनाएं द्य इस अदृश्य खतरे से बचने के लिए हम सबको अपने-अपने स्तर पर आवाज़ उठानी ही होगी।

Author: Jai Lok





