
चैतन्य भट्ट
(जयलोक)। कई बरस पहले चेतन आनंद द्वारा निर्मित और निर्देशित एक फिल्म आई थी जिसका नाम था ‘कुदरत’ फिल्म का एक गाना बड़ा मशहूर हुआ था ‘हमें तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना’ उस गाने की एक पंक्ति ये भी थी ‘क्या-क्या जतन करते हैं तुम्हें क्या पता हमें तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जानते’ इस गाने को सरकार ने अपना मूल मंत्र मान लिया है। उसका कहना है कि हम अपने देश के मतदाताओं से कितना प्यार करते हैं ये हम जानते तो नहीं है लेकिन उनके बिना हम जी नहीं सकते क्योंकि उनके वोटो से हमारी सरकार बनती है और फिर हम सत्ता में आकर सत्ता की मलाई चाटते हैं। अब देखो ना देश में ‘डायबिटीज’ के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं ‘वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन’ भी इस बात को लेकर बड़ा चिंतित है कि भारत के लोग मीठा खाने में बहुत आगे हैं और इसी चक्कर में उनकी शुगर बढ़ती जा रही है। सरकार को अपने लोगों की बड़ी चिंता थी तो उसने शक्कर के दामों में चालीस फीसदी की बढ़ोत्तरी कर दी कि जब शक्कर के दाम बढ़ जाएंगे तो मिठाई के दाम भी बढ़ेंगे और जब मिठाई के दाम बढ़ेंगे तो लोग मिठाइयां कम खाएंगे और जब मिठाइयां कम खाएंगे तो उनकी शुगर भी नहीं बढ़ेगी। आप सोचो कितना ध्यान रखती है अपने लोगों की ये सरकार। अपने समाज में तो हर त्यौहार में मिठाई बनना जरूरी है। जन्मदिन हो, शादी ब्याह हो, मुंडन संस्कार हो, राखी हो, दिवाली हो, दशहरा हो, मेहमान आए हों हर घर में मिठाई जरूर आएगी। अब जब मिठाई आएगी तो घर वाले मिठाई खाएंगे और मिठाई खाएंगे तो शुगर बढऩा लाजमी है, अब सरकार हर आदमी को तो इस बात की सलाह दे नहीं जा सकती कि भैया शक्कर मत खाओ, आपको मधुमेह हो जाएगा या आपकी शुगर बढ़ जाएगी तो सबसे अच्छा उपाय यही सोचा कि शक्कर की कीमत एकदम से बढ़ा दो ‘ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी’। लोगों को तो सरकार का धन्यवाद अदा करना चाहिए कि उसने लोगों के स्वास्थ्य की चिंता के प्रति इतनी चिंता दिखाई। क्योंकि उसको मालूम है कि एक बार अगर डायबिटीज हो गई तो फिर जिंदगी भर गोली खाना पड़ेगी या फिर इंसुलिन लेना पड़ेगी इसका खर्चा भी सरकार ने बचा दिया। जब मिठाई नहीं खाओगे तो शुगर बढ़ेगी नहीं और जब शुगर बढ़ेगी नहीं तो ना तो इंसुलिन लेना पड़ेगी और ना ही दवाई खाना पड़ेगी, लेकिन विरोधियों को इसमें भी चैन नहीं है पूरे देश में हल्ला मचाए पड़े हैं कि सरकार ने शक्कर के दाम बढ़ा दिए ,अरे भाई ये तो सोचो कि इस शक्कर के दाम बढ़ाने के पीछे कितनी बड़ी ‘फिलासफी’ काम कर रही है अगर यही फिलासफी समझ लें विरोधी दल वाले तो फिर काहे का विरोध करेंगे। लेकिन चूंकि उन्हें तो सरकार का विरोध करना है तो वो करेंगे लेकिन उनको भी ये सोचना चाहिए कि उनकी पार्टी में भी न जाने कितने डायबिटीज के मरीज होंगे। शक्कर के दाम बढ़ाकर सरकार अपने विरोधियों की जान की रक्षा के लिए तत्पर हो चुकी है ऐसी सरकार को थैंक्यू कहना बहुत जरूरी है।
विजयवर्गीय उवाच – मध्यप्रदेश के बड़े भारी भरकम नेता हैं ‘कैलाश विजयवर्गीय’ वे बोलते पहले हैं और सोचते बाद में हैं, कई बार अपने इसी बड़बोलेपन को लेकर अलसेट भी खा चुके हैं उसके बावजूद उनके मुखारविंद से ऐसी बातें निकल जाती हैं जो उन्हें विवाद का केंद्र बना देती है। जब से शक्कर के दाम बढ़े हैं तब से वे एक ही रट लगाए हैं कि लोगों को मिठाई पसंद नहीं है इसलिए शक्कर महंगी होने से किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसा ही बयान एक बार ‘वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण’ जी ने दिया था जब उनसे प्याज के बढ़े दामों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कह दिया कि मैं तो प्याज खाती नहीं। लगता है विजयवर्गीय जी को मिठाई की बजाय नमकीन ज्यादा पसंद है इसलिए उनकी जबान भी तीखी हो गई है वे अक्सर मीठी बातें ना करके तीखी बातें ही करते हैं। अब इन नेताजी से पूछो कि
भैया किसने बोल दिया आपसे कि लोगों को मिठाई पसंद नहीं है। दुनिया भर की – बड़ी-बड़ी ‘स्वीट शॉप’ काहे के लिए खुली हैं जहां तरह-तरह की मिठाइयां बिक रही हैं, अगर लोगों को मिठाईयां पसंद नहीं है तो इन स्वीट शॉप्स में तो कब का ताला लग जाता बेचारे हलवाई बेरोजगार हो जाते। लेकिन विजयवर्गीय तो विजय वर्गीय हैं उनके तो जो मन में जो आता है बोल देते हैं फिर बाद में कई बार माफी नामा भी लोगों के सामने पेश करना पड़ता है। अपनी उनको एक सलाह है कि कोई भी बयान जारी करने के पहले आठ दस बार उस बयान की प्रैक्टिस कर लिया करें और दो-चार एक्सपर्ट से पूछ भी लिया करें कि मेरे इस बयान का कोई उल्टा असर तो नहीं होने वाला, लेकिन अपने को ये मालूम है कि भैया ऐसा कुछ नहीं करेंगे उन्हें तो जो बोलना है वह बोलेंगे विरोधियों को बुरा लगे तो लगे अपनी बला से।
एक प्रेमी ऐसा भी – लोग बाग कहते हैं कि इंसान यदि मोहब्बत में पड़ जाए तो आशिक महबूबा के लिए तारे भी तोडक़र लाने की बात कहता है। सफर फिल्म का एक एक गाना भी है जो आशिक अपनी महबूबा के लिए गा रहा है ‘जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे तुम दिन को अगर रात तो हम रात कहेंगे’ यानी अगर महबूबा ने जो मांग कर दी उसको आशिक जान लगाकर पूरा करने का प्रयास करता है, लेकिन महाराष्ट्र का एक प्रेमी बड़ा अजीब निकला, महाराष्ट्र में ड्रग इंस्पेक्टर की परीक्षा हो रही थी और एक महबूबा ने अपने प्रेमी से पेपर लाने के लिए कहा, उस बेचारे ने न जाने कहां से जुगाड़ लगाकर प्रेमिका को पेपर दे दिया और वह पास भी हो गई लेकिन फिर पता नहीं अचानक क्या हुआ उन दोनों का ब्रेकअप हो गया, अब आशिक भारी नाराज, उसने पेपर लीक होने की शिकायत ‘लोक सेवा आयोग’ से कर दी और उसके बाद छह लोग गिरफ्तार भी हो गए जिसमें ये आशिक भाई साहब भी शामिल थे। लेकिन महबूबा का क्या हुआ ये अभी पता नहीं लगा है लेकिन एक बात जरूर समझ में आती है कि यदि प्रेमी नाराज हो जाए तो फिर क्या से क्या हो सकता है यह घटना से सामने आ चुका है।

सुपर हिट ऑफ द वीक
‘परसों मेरी बीबी कुएं में गिर गई थी, बहुत चोट लगी, बहुत चिल्ला रही थी।’ श्रीमान जी ने अपने दोस्त से कहा
‘अब कैसी है?’ मित्र ने घबरा कर पूछा
‘अब ठीक है, कल से कुएं से आवाज नहीं आई’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।

अंधत्व की अनुभूति के लिए आँखों में पट्टी बांधकर निकली रैली, महापौर की उपस्थिति में हुआ आयोजन
Author: Jai Lok






