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राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह को मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि

कविता के जरिए छेड़ी थी विद्रोह क्रांति, घुटने टेकने को मजबूर हो गए थे अंग्रेज-मोहन यादव

जबलपुर (जय लोक)। राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस का कार्यक्रम भव्य तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राकेश सिंह सहित अन्य मंत्री भी उन्हें श्रद्धांजलि देने शहर पहुँचे। जहां उन्हें श्रद्धांजलि देकर उनके बलदान को याद किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रवास के दौरान जनजातीय महानायक अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर उनकी गौरवगाथा का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने बिना कोई मुकदमा चलाए महाराज शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को तोप से उड़ाने का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री ने अंग्रेजों के शासन की आलोचना करते हुए कहा कि अंग्रेज तो कहते हैं कि हम तो न्याय से चलते हैं, पद्धति से चलते हैं, मुकदमे लगाकर फैसले करते हैं। लेकिन ये फैसले इस बात के गवाह हैं कि दोनों राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को बगैर कोई मुकदमा चलाए, बिना किसी प्रक्रिया के पालन किए उन्हें तोप से उड़ाने का निर्णय लिया था।

डराने वाले मिट गए लेकिन राजा शंकर शाह रघनाथ शाह अमर हो गए-मुख्समंत्री
जिस प्रकार से पिता पुत्र ने अपने बलिदान के पहले अपने गीतों कविताओं के माध्यम से आजादी की अलख जगाने का काम किया। उसी के कारण तलवारा से जो काम नहीं हो पाया वह काम उनकी कलम ने कर दिखाया। जनता के बीच उनके गीत एक तरह से नया जीवन लेकर आगे बढ़ें, उनके बेटे रघुनाथ शाह ने भी अपने पिता का साथ दिया।
अंगे्रज पिता पुत्र से डरके कांपने लगे और उन्होंने इसी डर से उन्हें पकड़ा और बंदी बनाकर रखा गया। छोडऩे के लिए शर्त रखी कि धर्म छोडक़र ईसाई बनना पड़ेगा लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया और मौत को हंसकर स्वीकार कर लिया। शंकर शाह रघुनाथ शाह ने हमे सिखाया कि हम जिस धर्म में पैदा हुए हैं उसी धर्म में मरेंगे। डराने वाले मिट गए लेकिन राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह अमर हो गए, ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है। जिसका जन्म हुआ उसकी मृत्यु पक्का है लेकिन हमारे पुण्य मार्ग पर चलने वाले कदम नहीं मरते। हमारे गोंडवाना के अमर शहीदों ने जो करके दिखाया उसके आधार पर देश आजाद हुआ और आजाद देश में एक भी अंगे्रज नहीं बचा। यह शंकर शाह रघुनाथ शाह जैसे बलिदानियों का ही परिणाम है। आदिवासियों के लिए सिकलसेल से बचाने के लिए सही जांच की जा रही है। हमनें ऐसे बलिदानियों को पाठ्यक्रमों में शामिल किया ताकि दुनिया इनके बारे में जान सके।

कांगे्रस ने इनके बलिदान को भुलाया
विरोधी दल के लोगों ने जमाने भर में समाज के वोट पाने के लिए झूठ बोला लेकिन उन्हें पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बनने दिया। लंबे समय तक कांगे्रस और उनकी सरकारें रहीं लेकिन आदिवासी समाज के किसी भी व्यक्ति को कभी राष्ट्रपति नहीं बनाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदिवासी बहन द्रोपदी मुर्मु को राष्ट्रपति बनाया। यह हमारे काम करने का तरीका है। शंकर शाह राजा रघुनाथ शाह के बलिदान स्थल का जीर्णोंद्धार का काम किया गया।

अंगे्रजों की क्षमा याचना को ठुकराकर दिया बलिदान-राकेश सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि 169 वर्ष हो गए राजा शंकर शाह राजा रघुनाथ शाह के बलिदान को। जबलपुर वहीं पुण्य भूमि है जहां अंग्रेजों ने उन्हें तोप के मुंह से बांध के उड़ा दिया। केवल इसलिए कि वे दोनों देश की स्वतंत्रता के लिए कुछ भी करने को तैयार थे और वो भी भरी जनता के सामने उन्हें एक अवसर दिया कि वे माफी मांगे लें तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा। लेकिन पिता पुत्र के गौरव को देखिए उन्होंने कहा कि जो सजा दो मंजूर है लेकिन हम अंग्रेजों के सामने नहीं झुकेंगे। जब पिता पुत्र को तोप के मुंह में बांधा जा रहा था तब भी उन्होंने कहा कि चाहे जितनी बार तोप के मुंह में बांधकर उड़ा दो शरीर का एक एक हिस्सा उड़ेगा लेकिन हमारे मुंह से क्षमा याचना नहीं निकलेगी। अंगे्रजों के सर्वनाश की आशा ही निकलेगी। वे आज हमारे बीच नहीं हैं। अंग्रेजों ने पिता पुत्र को यह सोच के साथ उड़ा दिया कि उनका नामों निशान ना बचे लेकिन आज देखिए नियती का चक्र कि उन्हें स्मरण करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के साथ साथ जबलपुर महाकौशल खड़ा है।

जबकि जिन्होंने उन्हें तोप के मुंह में बांधकर उड़ाया था उनका नामोनिशान नहीं बचा। जनजातीय समाज के सहयोग, सुधार के लिए 65 सालों तक विपक्ष कहां था। जब जनजातीय समाज के गौरव के बारे में एक शब्द नहीं कहा गया। लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में इन जैसे गौरवशाली लोगों को याद कर पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। इनके स्थानों को भव्य बनाएंगे इन्हें स्मरण करेंगे ताकि आने वाली पीढ़ी भी इनके बारे में जान सके। हम इनके ऋणि हैं राजा शंकर शाह राजा रघुनाध शाह के जो रानी दुर्गावती के वंशज है। उन्होंने अपनी वंश परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस देश को आजाद कराने में अपनी भूमिका निभाई। अब हम सब की जिम्मेदारी है एक नागरिक होने के नाते कि जो उन्होंने अपनी प्रेरणा के रूप में छोड़ा है उसे आत्मसात करते हुए देश प्रदेश के लिए अपने हिस्से को जो भी बेहतर दे सकते हैं वो देते हुए विकास की इस धारा को आगे बढ़ाएं।

बलिदानियों की जीवनगाथा पाठ्यक्रमों में की जा रही शामिल-कुंवर विजय शाह
जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक अद्भुत काम किया है जो कम लोग जानते हैं कि मप्र में जितने भी आदीवासी छात्रावास है उनका नाम शंकर शाह रघुनाश शाह छात्रावास रख दिया है। यह सच्ची श्रद्धांजलि है ताकि आने वाली पीढ़ी को इनका बलिदान याद रहे। शंकर शाह रघुनाथ शाह की एक घंटे की फिल्म भी बनाई गई है। जिसका एक नवंबर को मप्र के स्थापना दिवस पर जहां पिता पुत्र को कैद करके रखा गया था वहां प्रदर्शन भी किया जाएगा। शनिवार रविवार को यह फिल्म दिखाई जाएगी। जिसकी व्यवस्था की गई है।
देश की आजादी के लिए हजारों लोगों ने बलिदान दिया जिसमें आदिवासी जननायक भी हैं। जबलपुर में तोप के मुंह में बांधकर उनके चिथड़े उड़ा दिए गए। लेकिन जब देश की आजादी का इतिहास हम पढ़ते हैं तो उनका नाम लिया गया जिन्होंने देश की आजादी के लिए ऊंगली तक नहीं कटाई और शंकर शाह रघुनाथ शाह को भूला दिया गया।
आज मुख्यमंत्री के निर्देश पर आने वाली पाठ्य पुस्तक सामग्री में इनके योगदान को पढ़ाया जाएगा। ताकि आने वाली पीढ़ी तक इनकी शहादत की जानकारी मिले। 5 अक्टूबर को रानी दुर्गावती का जन्मोत्सव है इस अवसर पर बड़े पैमाने पर इनके वंशजों को बुलाकर सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद आशीष दुबे, सांसद सुमित्रा बाल्मिक, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायगण अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, इंदु तिवारी, संतोष बरकड़े, नीरज सिंह, पूर्व विधायक अंचल सोनकर, संदीप जैन, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, महामंत्री सोनी बचवानी, रंजीत पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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