
विलनियस। लिथुआनिया ने कम ऊंचाई पर उडऩे वाले ड्रोन से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने घरों में पड़े पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा बनाएं। इन फोन में विशेष सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर उन्हें ड्रोन डिटेक्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस परियोजना को ‘ड्रोन रडार’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन की समय रहते पहचान कर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क करना है।
इस प्रणाली में पुराने एंड्रॉयड फोन का माइक्रोफोन लगातार आसपास की आवाजें रिकॉर्ड करेगा। यदि उसे ड्रोन जैसी भनभनाहट सुनाई देती है, तो सॉफ्टवेयर उस आवाज की तुलना पहले से मौजूद ऑडियो डेटाबेस से करेगा। यदि आवाज ड्रोन से मेल खाती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर सकता है। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पारंपरिक हवाई निगरानी प्रणाली पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों की भागीदारी से तैयार यह नेटवर्क ड्रोन की मौजूदगी का जल्दी पता लगाने में मदद करेगा और सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराएगा।
इस तरह की ध्वनि पहचान तकनीक का उपयोग पहले से यूक्रेन में किया जा रहा है, जहां इसका इस्तेमाल ड्रोन और अन्य उडऩे वाली वस्तुओं की पहचान के लिए किया जाता है। लिथुआनिया ने भी अपनी सीमाओं पर कई ध्वनि सेंसर लगाए हैं और अब पूरे देश में इस नेटवर्क का विस्तार करने की योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रणाली मौजूदा हवाई निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बना सकती है।
सरकार का कहना है कि नई सुरक्षा तकनीकों की खरीद और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में समय लगता है। ऐसे में आम नागरिकों की मदद से तैयार किया गया यह नेटवर्क एक व्यावहारिक और कम लागत वाला विकल्प साबित हो सकता है। इससे किसी संभावित खतरे की पहचान पहले की जा सकेगी और सुरक्षा एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई में सहायता मिलेगी।
हाल के महीनों में लिथुआनिया में सुरक्षा संबंधी घटनाओं और एयर रेड अलर्ट की संख्या बढ़ी है। इसके बाद सरकार ने नागरिक सुरक्षा तैयारियों पर विशेष जोर देना शुरू किया है। देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोगों को आपात स्थिति में सुरक्षित रहने, नजदीकी शेल्टर की जानकारी रखने और आवश्यक सामान से लैस इमरजेंसी बैग तैयार करने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहने, बल्कि स्वयं भी आपात परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और नागरिक सहयोग का यह मॉडल भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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Author: Jai Lok






