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चुनाव के पहले युवाओं की बढ़ी पूछपरख

भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दल युवाओं को अब साधेंगे

जबलपुर (जय लोक)। प्रदेश में अब अगले वर्ष जहां नगर निगम और नगर पालिकाओं के चुनाव होने जा रहे हैं वहीं 2028 में मध्य प्रदेश विधानसभा के भी चुनाव होंगे। इन दोनों चुनावों के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी तथा विपक्षी दल कांगे्रस दोनों ही प्रदेश के युवाओं को साधने में लगे हैं।
विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन उससे पहले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही युवा वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं। प्रदेश की राजनीति में जेन-जी और युवा मतदाताओं को लेकर रणनीति बदल रही है, जिसका असर जबलपुर की स्थानीय राजनीति और दोनों दलों के युवा संगठनों में भी दिखाई दे रहा है।
जबलपुर जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में युवाओं का मुद्दा केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप, खेल और शहर में बेहतर अवसर युवाओं की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवाओं से संवाद और उनके स्थानीय मुद्दों को उठाना महत्वपूर्ण हो गया है।

भाजपा ने संगठन में युवाओं पर ध्यान किया केन्द्रित

भाजपा युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर रणनीति तैयार कर रही है। प्रदेश में भाजयुमो के संगठनात्मक विस्तार के तहत जबलपुर ग्रामीण की जिम्मेदारी पंकज तिवारी को सौंपी गई है। जबलपुर में भाजपा के सामने चुनौती यह है कि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को युवाओं तक पहुंचाने के साथ स्थानीय स्तर पर उनके सवालों को भी संगठन से जोडक़र रखा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, कॉलेज विद्याथिज़्यों, रोजगार तलाश रहे युवाओं और नए कारोबार शुरू करने वाले युवाओं तक पहुंच बनाने पर आने वाले समय में जोर बढ़ सकता है।

कांग्रेस भी दे रही युवाओं को महत्व

 

कांग्रेस भी भाजपा को युवाओं के मोर्चे पर खुला मैदान देने के मूड में नहीं है। युवा कांग्रेस के संगठन में जबलपुर की भूमिका पहले से महत्वपूर्ण रही है और पार्टी लगातार युवा नेताओं को आगे लाने की कोशिश कर रही है। मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में भी जबलपुर के युवा नेता यश घनघोरिया का नाम प्रमुखता से सामने आया था। कांग्रेस के लिए जबलपुर में युवाओं को जोडऩे का सबसे बड़ा आधार रोजगार, भर्ती परीक्षाएं, शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दे हो सकते हैं। पार्टी इन मुद्दों पर आंदोलन और प्रदर्शन के जरिए युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति अपना सकती है।

रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा

युवा मतदाताओं को साधने की राजनीतिक कोशिशों के बीच जबलपुर में रोजगार का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। शहर में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र में रोजगार, नए उद्योग, स्टाटज़्अप और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी युवाओं के लिए अहम हैं।राजनीतिक दलों के सामने चुनौती सिर्फ  युवाओं को कार्यक्रमों में बुलाने की नहीं, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाने की है कि पार्टी उनके भविष्य से जुड़े सवालों को प्राथमिकता देगी।

निकाय चुनाव में मिल सकता है युवाओं को मौका

आने वाले नगरीय निकाय चुनाव दोनों दलों के लिए युवा नेतृत्व की परीक्षा भी बन सकते हैं। टिकट वितरण से लेकर वार्ड स्तर के संगठन तक युवा चेहरों को कितनी जगह मिलती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। हाल में एसआईआर के बाद जबलपुर के नौ नगरीय निकायों की अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 9 लाख 86 हजार 949 दर्ज हुई है। ऐसे में स्थानीय चुनावों में मतदाता सूची और अलग-अलग आयु वर्ग के वोटरों का गणित राजनीतिक दलों की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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