
जन विश्वास अभियान का असर
100 दिन से अटकी शिकायतों पर अब अफसरों की नजर
भोपाल (जयलोक)। मध्य प्रदेश में लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में अटकी शिकायतों और आवेदनों को लेकर अब प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली बदलती नजर आ रही है। जन विश्वास अभियान शुरू होने के बाद 100 दिन से लंबित शिकायतों में से 39 हजार 194 मामलों में महज चार सप्ताह के भीतर सुनवाई की गई। इनमें करीब 75 प्रतिशत शिकायतें सही पाई गईं, जिसके बाद संबंधित लोगों को राहत दिलाई गई। सरकार के इस अभियान का असर सिर्फ शिकायतों की सुनवाई तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, एसीएस, पीएस और विभागाध्यक्षों के स्तर पर जिलों का दौरा और जनता से सीधे संवाद के बाद उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होने लगी है, जिनके स्तर पर लोगों के काम लंबे समय से अटके हुए थे। जन विश्वास अभियान शुरू होने के पहले से लेकर 29 अगस्त से पहले तक 1.31 लाख शिकायतें ऐसी थीं, जिनकी 100 दिन के भीतर सुनवाई नहीं हो सकी थी। अभियान के दौरान अफसरों की जवाबदेही बढऩे के बाद इनमें से 39,194 लोगों की चार सप्ताह के भीतर सुनवाई की गई। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत करता है कि शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद बड़ी संख्या में मामले लंबे समय तक लंबित पड़े रहे। अभियान के बाद इन मामलों को प्राथमिकता मिलने लगी।
8.71 लाख शिकायतें आईं, 4.78 लाख लोगों को सुना
7 अगस्त से शुरू हुए जन विश्वास अभियान के दौरान 29 अगस्त से पहले तक सीएम हेल्पलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से 8.71 लाख लोगों ने शिकायतें कीं। इनमें से अधिकारियों ने 4.78 लाख लोगों की सुनवाई की। सरकार के अनुसार यह पहली बार है जब इतनी कम अवधि में इतने बड़े पैमाने पर शिकायतकर्ताओं की सुनवाई हुई। बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलने से सरकारी व्यवस्था के प्रति लोगों में न्याय मिलने की उम्मीद बढऩे का दावा किया जा रहा है।
लोकसेवा गारंटी में भी लाखों आवेदन निपटे
लोकसेवा गारंटी के तहत भी इस अवधि में बड़ी संख्या में आवेदन आए। 7 अगस्त से पहले से लेकर 29 अगस्त के पूर्व तक 10.26 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इनमें आय, जाति, मूल निवासी, स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड और खाद्यान्न पर्ची सहित विभिन्न सेवाओं से जुड़े आवेदन शामिल थे। इनमें से 7.60 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। वहीं 3,109 ऐसे आवेदन भी सामने आए, जिनका निर्धारित समय-सीमा के बावजूद निपटारा नहीं हुआ था। इनमें से 1,941 लोगों को संबंधित सेवा या लाभ दिलाया गया।
जनता दरबार से सीधे जिलों तक पहुंची सरकार
जन विश्वास अभियान के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं जिलों में पहुंचकर जनता की समस्याएं सुन रहे हैं। मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा, बड़वानी, टीकमगढ़ और बालाघाट में जनता दरबार कर चुके हैं। मंत्री भी अपने प्रभार वाले जिलों में दौरे कर रहे हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिलों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज की वास्तविक स्थिति देखने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे कागजों पर होने वाले काम और जमीन पर उनकी स्थिति के बीच अंतर सामने आने की संभावना बढ़ी है।
अब लापरवाही पर सिर्फ शिकायत नहीं, कार्रवाई भी
जन विश्वास अभियान की सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक खासियत यह है कि सरकार ने काम में लापरवाही को सीधे अधिकारी की जिम्मेदारी से जोड़ दिया है। अभियान के दौरान काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। कुछ मामलों में निलंबन और वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई भी सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जनता के काम अटकाने वाले शासकीय सेवकों की जिम्मेदारी तय होगी और कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
Author: Jai Lok






