
परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। जबलपुर में कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालने आये आईएएस अधिकारी अरुण कुमार विश्वकर्मा 2014 बैच के चयनित अधिकारी हैं। मध्य प्रदेश कैडर मिलने के बाद विभिन्न पदों पर रहते हुए बतौर कलेक्टर जबलपुर उनका चौथा जिला कहा जा सकता है। पूर्व में भी उनकी जबलपुर संभाग में कई जिलों में पदस्थापना हो चुकी है। इस वजह से उनका जबलपुर आना जाना भी होता रहा है। अरुण कुमार विश्वकर्मा के नाम से बतौर कलेक्टर सबसे पहले 14 जनवरी 2021 को डिंडोरी में पदस्थ होने रिकॉर्ड दर्ज है। जो 24 जनवरी 2021 तक दर्ज दिखाता है। इसके बाद में 30 दिसंबर 2022 से 11 अक्टूबर 2023 तक कलेक्टर निवाड़ी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके पक्ष में जनवरी 2025 तक अपर संचालक मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 27 जनवरी 2025 को शासन ने उन्हें बतौर कलेक्टर जिला रायसेन की जिम्मेदारी दी थी।

वर्तमान में वे कलेक्टर रायसेन के रूप में ही अपनी सेवाएं दे रहे थे और अब शासन ने उन्हें जबलपुर जैसे बड़े जिले की जिम्मेदारी सौंपी है।अपनी शासकीय सेवा की शुरुआत के दौरान श्री विश्वकर्मा रीवा में एसडीम, सीईओ जिला पंचायत सीहोर, जिला पंचायत डिंडोरी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर डिंडोरी, कलेक्ट इंदौरी कलेक्टर निवाड़ी अपर संचालक मध्य प्रदेश राज्य कृषि वितरण बोर्ड फिर वर्तमान में कलेक्टर रायसेन की जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कर चुके अरुण कुमार विश्वकर्मा ने अपना ग्रेजुएशन डीमैट यूनिवर्सिटी से पूर्ण किया है। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा की ओर अपना रुख किया। मूलत: उत्तराखंड के चंपावत जिले के बनवास के फागपुर गांव में शासकीय सेवा से निवृत्त श्री कैलाशराम विश्वकर्मा के घर में जन्मे अरुण कुमार बचपन से ही मेधावी छात्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने में सफल रहे हैं।
पत्नी भी हैं 2017 की आईएएस अधिकारी
2014 बैच के आईएएस अधिकारी अरुण कुमार विश्वकर्मा की धर्मपत्नी भी 2017 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। श्रीमती अंजू अरुण कुमार यूपीएससी परीक्षा में चयनित होने के बाद उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला था लेकिन बाद में उसे बदलकर विवाह के पश्चात मध्य प्रदेश कैडर प्रदान कर दिया गया था।
शासन की योजना और जिले के विकास पर रहता है अधिक ध्यान
श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा के कार्य करने की पद्धति से यह बात स्पष्ट होती है कि उनकी कार्य प्रणाली में मध्य प्रदेश शासन की जनहितैशी योजनाओं का प्रचार प्रसार और उसका अधिक से अधिक लाभ जिले की जनता तक पहुंचे यह पहली प्राथमिकता रहती है। दूसरा बतौर जिला के प्रमुख अधिकारी उनकी अगली प्राथमिकता जिले के अधूरे विकास कार्यों को पूरा कर और जिले के लिए क्या अधिक बेहतर हो सकता है उसकी रूपरेखा पर जल्द क्रियान्वयन शुरू करने की होती है।
जबलपुर महानगर के स्वरूप लेने की प्रसव पीड़ा को झेलने वाला शहर समझा जाता है और इस अंतराल में शहर को विकसित करने के बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा को अपनी कार्यशैली के अनुरूप जिले में यातायात व्यवस्था, अतिक्रमण की समस्याओं जैसी मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने की चुनौती के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार और रोजगार सृजन के क्षेत्र में काफी कार्य करने के लिए खुला मैदान मिलेगा।
विशेष उपलब्धियाँ
श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा ने अपने कार्यकाल में विशेष उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। डिंडौरी सीईओ रहते निर्वाचन कार्य में विशेष कार्य करने पर वे राज्यपाल से पुरस्कृत हुए थे। केवलारी में पदस्थापना के दौरान राजस्व कार्य में उपलब्धि मिलने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।
दूसरी बार में अर्जित की यूपीएससी परीक्षा में सफलता
अरुण कुमार विश्वकर्मा ने इंजीनियरिंग और बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद यूपीएससी में भाग्य आजमाने का निर्णय लिया और शासकीय सेवाओं के माध्यम से जन सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने का मन बनाया और इस दिशा में तैयारी करते हुए संघ लोक सेवा आयोग की 2013 की परीक्षा में 122वें स्थान पर सफलता अर्जित की।
इसके पूर्व उन्होंने 2011 में भी यूपीएससी की परीक्षा में बैठकर अपना भाग्य आजमाया था और उस दौरान उनका 738 वां रैंक लगा था। जो कमियां थी उन्हें पूरा किया गया जो अड़चनें थी उन्हें दूर किया गया और कुछ समय की जोरदार तैयारी के बाद 2013 में उन्होंने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की।





