
सुनवाई के दौरान माइक्रोफोन छीने जाने का आरोप लगा वरिष्ठ वकील ने सात मामलों से नाम वापस लिया
नई दिल्ली (जयलोक)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच दिल्ली के कनॉट प्लेस में शुक्रवार को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर विवाद गहरा गया। प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई और उम्मीद व्यक्त की कि प्रदर्शनकारियों को सद्बुद्धि आएगी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति देने से इनकार करते हुए लोगों से इससे दूर रहने की अपील की। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कथित अव्यवस्था से नाराज वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सात मामलों की पैरवी से खुद को अलग कर लिया। गौरतलब है कि सीजेपी ने शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एकत्र होकर तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया था। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है, जिसके तहत लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है।
पुलिस ने यह भी कहा कि सीमित संख्या में लोगों को किसी उपयुक्त स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दी जा सकती है। इधर, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम लोगों के लिए बंद रखने की घोषणा की। यह घटनाक्रम दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सीजेपी को प्रदर्शन करने से रोकने से इनकार किए जाने के बाद सामने आया। प्रदर्शन का ऐलान संगठन के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद किया गया था। कनॉट प्लेस के व्यापारियों के संगठन न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे विरोध-प्रदर्शन के लिए किसी अन्य स्थान का चयन करें। संगठन ने कहा कि वह विरोध करने और अपनी आवाज उठाने के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन कनॉट प्लेस व्यापारियों का कार्यस्थल है। प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
संगठन ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा कि बेहतर भविष्य के लिए प्रदर्शन करते समय लोगों के वर्तमान रोजगार और आजीविका को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसी मामले से जुड़े सात प्रकरणों में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान बार-बार बाधा डालने और माइक्रोफोन छीने जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अदालत में व्यवस्था बनाए रखने में पीठ विफल रही और ऐसी परिस्थितियों में काम जारी रखना संभव नहीं है। उनके मुताबिक, अदालत की गरिमा किसी भी मामले में अपनी उपस्थिति बनाए रखने से अधिक महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने करीब 46 याचिकाओं पर सुनवाई की। ये याचिकाएं पुलिस कार्रवाई, कथित गैरकानूनी हिरासत, आवाजाही पर प्रतिबंध, पत्रकारों के अधिकारों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित थीं।





