
तीन साल के कामकाज के बाद मोहन यादव के सामने अब असली परीक्षा
भोपाल (जयलोक)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार दिसंबर में तीन साल पूरे करने जा रही है। शुरुआती तीन वर्षों में सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं तय करने, निवेश जुटाने और विकास परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया। अब कार्यकाल के शेष दो साल उसके लिए ज्यादा निर्णायक होने वाले हैं। वजह केवल 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि उससे पहले स्थानीय निकायों के चुनाव और उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ भी है। यानी सरकार को एक तरफ विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना है तो दूसरी तरफ राजनीतिक और संगठनात्मक मोर्चे पर भी अपनी पकड़ साबित करनी है। मोहन यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक की घोषणाओं, निवेश प्रस्तावों और विकास के लक्ष्यों को आम आदमी के जीवन में दिखाई देने वाले बदलाव में कैसे बदला जाए। सरकार के पहले वर्ष में महिला कल्याण, दूसरे वर्ष में उद्योग और निवेश तथा तीसरे वर्ष में किसान कल्याण को प्राथमिकता दी गई। अगले वर्ष को युवाओं के लिए समर्पित करने की तैयारी है। इस तरह सरकार ने अपने कार्यकाल को अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों की प्राथमिकताओं के साथ जोडऩे की कोशिश की है।
निवेश की बड़ी तस्वीर, जमीन पर उतारने की चुनौती
प्रदेश में निवेश आकर्षित करना मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। तीन साल में 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आने का दावा है। इनमें करीब 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतरने की बात कही जा रही है। सरकार का जोर अब निवेश को उद्योगों, उत्पादन और रोजगार से जोडऩे पर है। लाखों युवाओं को रोजगार मिलने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि आने वाले समय में निवेश की वास्तविक स्थिति और उससे पैदा होने वाले स्थायी रोजगार सरकार के कामकाज का महत्वपूर्ण पैमाना होंगे। सरकारी क्षेत्र में भी दो लाख से अधिक पदों पर भर्ती की तैयारी है। लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया का रास्ता खोलना भी कर्मचारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला रहा है।
किसान और गांव होंगे अगले चुनाव की कसौटी
मध्य प्रदेश की राजनीति में किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था हमेशा निर्णायक रहे हैं। मोहन सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, खाद और बिजली की उपलब्धता, सोलर पंप, फसल क्षति पर मुआवजा और किसान सम्मान निधि जैसे उपायों के जरिए किसानों को साधने की कोशिश की है। गोपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को खेती के साथ जोडकऱ ग्रामीण आय बढ़ाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।





